नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को कहा है कि परमाणु व्यापार पर जी-8 के रुख का भारत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है, क्योंकि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर न करने वाले देशों को संवर्धन और पुनशरेधन प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण पर रोक लगाने के मुद्दे पर 45 सदस्यों वाले परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में सहमति नहीं है।
प्रधानमंत्री सिंह ने लोकसभा में एक बहस के दौरान अपने जवाब में कहा, ''एनएसजी द्वारा इस तरह की प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण पर रोक लगाने के लिए उसमें शामिल 45 देशों में सहमति की जरूरत होगी। लेकिन फिलहाल उनके बीच ऐसी स्थिति नहीं है।' सिंह ने यह भी कहा कि एनपीटी पर भारत राजी नहीं होने वाला है।
प्रधानमंत्री इटली में जी-8 द्वारा जारी किए गए उस बयान का हवाला दे रहे थे, जिसमें गैर एनपीटी देशों को परमाणु संवर्धन और पुनशरेधन (ईएनआर) प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण पर रोक लगाने की बात कही गई थी। प्रधानमंत्री ने कहा, 'सरकार पूर्ण अंतर्राष्ट्रीय असैन्य परमाणु सहयोग की उपलब्धि के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।'



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