नई दिल्ली:
राजधानी में जो पकड़ी गई नकली दवाओं के असली ब्रांड का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किया जाता है। ये दवाएं हैं- वोवेरान-एसआर 100, स्लो डिक्लोफेनेक बीपी और नोवारटिस कंपनी की कुछ प्रचलित दवाईयां। ये दवाएं पकड़े जाने के बाद जब पुलिस ने दबिश की तो कुछ और आम दवाएं भी पकड़ी गईं। ''नोवारटिस इंडिया' के भारत स्थित प्रतिनिधि विलियम रॉलिन्स ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि पकड़ी गई दवाईयां नकली हैं।
क्राइम ब्रांच की एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट) के सूत्रों की मानें तो नकली दवाईयों का यह जाल पूरे देश में फैला हुआ है। यह गिरोह पूरे देश में नकली दवाएं सप्लाई कर रहा था। कुछ दिन पहले क्राइम ब्रांच को इस बात की गुप्त सूचना मिली थी कि नकली दवाईयों के कारोबारी राजधानी के कई इलाकों में केमिस्टों की दुकानों पर नकली दवाएं सप्लाई की जा रही हैं।
क्राइम ब्रांच ने बिहार के मधुबनी इलाके के रहने वाले रामचंद (52) नामक व्यक्ति के पास से करीब दो लाख रुपये की नकली दवाएं जब्त की थीं, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार व्यक्ति ने बताया वह पहले भी दिल्ली में नकली दवाएं सप्लाई करता रहा है।
सूत्रों ने बताया कि बाहरी राज्यों से नकली दवाएं लाने के एक-दो दिन के अंदर ही राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में केमिस्ट की दुकानों पर सप्लाई कर दी जाती थीं। इस गिरोह का ट्रांजिट पॉइंट भजनपुरा बना हुआ था। हालांकि, नकली दवाओं का रैकेट चला रहे कारोबारी दक्षिणी और पश्चिमी दिल्ली के रहने वाले हैं।
फोटो: दिल्ली में बिक रही हैं नकली दवाएं, पूरी तसल्ली करने के बाद ही खाएं
क्राइम ब्रांच को पता चला कि नकली दवाएं दिल्ली के दो व्यापारी यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल में तैयार करा रहे थे। वहीं से इनकी सप्लाई दिल्ली और आसपास के ईलाकों में की जाती थी। ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (क्राइम ब्रांच) अमूल्य पटनायक ने बताया कि अभी इस रैकेट के दो सरगनाओं की तलाश जारी है। पुलिस ने पश्चिम बंगाल, बिहार और यूपी में कई जगह छापे मारे हैं। पुलिस को नकली दवाएं बनाने वाली फैक्ट्री का सुराग मिल गया है।



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