भोपाल: शासन ने हड़ताल पर गए प्रदेश के लगभग 1300 जूनियर डॉक्टरों को निष्कासित कर दिया है। पांचों मेडिकल कॉलेजों के डीन ने मंगलवार को जूनियर डॉक्टरों के निष्कासन के आदेश जारी कर दिए। इस बाबत जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर हाईकोर्ट में केविएट भी दाखिल कर दी गई है। सरकार ने आयुष समेत सभी स्वास्थ्य सेवाओं को अत्यावश्यक घोषित करते हुए "एस्मा" लागू कर दिया है।
जूनियर डॉक्टर स्टाइफंड बढ़ाने, फीस घटाने जैसी मांगों के समर्थन में पिछले दो दिनों से हड़ताल पर हैं। इस बीच एस्मा लागू होने के बाद सीनियर और रेसीडेंट डॉक्टरों ने जूडा के समर्थन में हड़ताल पर जाने का फैसला वापस ले लिया है। सरकार जरूरत पड़ने पर सेना के डॉक्टरों की सेवाएं लेने पर भी विचार कर रही है।
मंगलवार को उच्चस्तरीय बैठक में हड़ताल के असर के बारे चर्चा की गई। बैठक में चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा ने अस्पतालों की व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में मरीजों की देखभाल के लिए जिलों एवं स्वास्थ्य केन्द्रों पर पदस्थ डॉक्टरों की सेवाएं लेने के निर्देश दिए।



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