नई दिल्ली: अब बाबा रामदेव भी सहमति से बनाए जाने वाले समलैंगिक संबंधों को कानूनी करार देने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले विरोध में खुलकर सामने आ गए हैं। योग गुरु बाबा गुरु बाबा रामदेव ने कहा है कि वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। इससे पहले विश्व हिंदू परिषद और कुछ दूसरे संगठनों ने भी इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही थी।
फोटो: समलैंगिकता को बीमारी मानते हैं योग गुरु स्वामी रामदेव
रामदेव के वकील सुरेश शर्मा और गंधर्व मक्कड़ ने जानकारी दी कि दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ बुधवार को याचिका दायर की जाएगी। उन्होंने कहा कि मंगलवार को ही याचिका दायर की जानी थी, लेकिन कुछ कारणों से नहीं की जा सकी। उन्होंने कहा कि रामदेव ने 2 जुलाई के फैसले को कई आधारों पर चुनौती देने का फैसला किया है। यह न सिर्फ नैतिकता के खिलाफ है, बल्कि इससे लोक स्वास्थ्य, स्वस्थ वातावरण और समाजिक हितों को भी नुकसान पहुंचेगा।
वकीलों के अनुसार, याचिका में कहा गया है कि समलैंगिक संबंध अप्राकृतिक तो हैं ही, इससे एक बड़ी आबादी के एड्स सहित कई गुप्त रोगों से ग्रस्त होने का खतरा भी है। याचिका में स्पेन के मनोविज्ञानी एनरिके रोहास का हवाला दिया गया है, जिनका मानना है कि समलैंगिकता एक बीमारी है, जिसे उपचार से ठीक किया जा सकता है। बाबा रामदेव की याचिका में कहा गया है कि इस तरह की प्रवृत्तियों को योग, प्राणायम और ध्यान के जरिए ठीक किया जा सकता है।
गौरतलब है कि 2 जुलाई 2009 को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले देते हुए कहा था कि बालिगों के बीच सहमति से बनाया गया समलैंगिक संबंध अपराध नहीं है। हाईकोर्ट ने यह फैसला धारा 377 के खिलाफ दायर की गई एक याचिका की सुनवाई करते हुए दिया था।



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