अजमेर, राजस्थान: सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 797 वें उर्स की औपचारिक शुरूआत हो गई है। ख्वाजा साहब की दरगाह में जायरीनों की बढ़ती संख्या को देखकर जियारत के लिए जन्नती दरवाजा खोल दिया गया है।
इस दौरान जियारत के लिए अकीदतमंदों की तांता लगा हुआ है। गरीब नवाज की मजार पर सालभर चढऩे वाला संदल पारंपरिक तरीके से उतार लिया गया है। इस दौरान मजार को लेने के लिए जायरीन उमड़ पड़े। जायरीनों ने ''''मेरे ख्वाजा हिन्द के राजा जैसे नारे लगाकर दरगाह को गूंजायमान कर दिया। खुद्दाम समुदाय की ओर से संदल सालभर मेहमानों में वितरित किया जाता है। साल में चार बार खुलने वाला जन्नती दरवाजा उर्स के दौरान छठी तक खुला रहेगा। चांद दिखने के साथ ही 797 वें उर्स की विधिवत शुरूआत हो जाएगी और दरगाह में विभिन्न रस्मों की अंजाम दिया जाएगा।
खादिम कुतबुद्दीन सखी का कहना है कि इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से जमादी उस्मानी माह की28 तारीख को मनाई जाने वाली संदल उतारने की रस्म का खादिम और जायरीन को बेताबी से इन्तजार रहता है। खादिम जिन लोगों को दुआगों होते है, उन्हें वे संदल का तबर्रूक आवश्य देते है। सखी ने बताया की साल भर का पहला संदल पेश किया जाता है, इसलिए हर खादिम चाहता है कि वह ख्वाजा के संदल पेश करे।



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