नई दिल्ली/लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संजय दत्त की लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़ने की अर्जी खारिज कर दी यानी अब वे चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। फैसले के बाद संजय दत्त के चेहरे पर साफ पढ़ी जा सकने वाली मायूसी देखी जा सकती थी, जिसे छिपाते हुए उन्होने कहा कि वे अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं।
उन्होंने कहा कि "लखनऊ मेरा शहर है और मैं इसे छोड़कर कहीं नहीं जा रहा।" मुस्कराने की कोशिश करते हुए संजय दत्त ने कहा कि "लखनऊ अभी भी मेरी सीट है और यहां से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी को मेरा पूरा समर्थन होगा।" वहीं, मान्यता दत्त की उम्मीदवारी की बारे में पूछे जाने पर वो टाल गए और उन्होंने केवल इतना कहा कि इस संदर्भ में फैसला लिया जाना बाकी है।
मुन्नाभाई नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आज एक अहम फैसला सुनाते हुए संजय दत्त को चुनाव लडने के अयोग्य करार दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संजय दत्त को एक बडा झटका लगा है। संजय दत्त अब लोकसभा चुनाव नहीं लड सकेंगे और इसी के साथ मुन्ना भाई के अभिनेता से नेता बनने का सपना टूट गया है। उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी (सपा) ने संजय दत्त को लखनऊ से उम्मीदवार बनाया था।
बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को मुंबई में वर्ष 1993 में हुए धमाकों के मामले में टाडा कोर्ट से आर्म्स एक्ट के तहत छह साल की सजा मिली हुई है। कानूनन यदि किसी व्यक्ति को दो साल से अधिक की सजा दी गई है, तो वो चुनाव नहीं लड सकता। संजय दत्त ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर टाडा कोर्ट की सजा को निलंबित करने और चुनाव लडने की अनुमति दी जाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने आज उनकी अर्जी को खारिज कर दिया। इस मामले में सोमवार को ही सुनवाई पूरी कर ली गई थी।
सीबीआई की दलील मंजूर
उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने संजय दत्त की याचिका का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि यदि संजय दत्त को राहत दी जाती है तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। सीबीआई ने कहा था कि इससे राजनीति में अपराधीकरण को बढावा मिलेगा।
कांग्रेस लखनऊ से उतारेगी उम्मीदवार
इस बीच कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की लखनऊ सीट से उम्मीदवार उतारने का ऎलान कर दिया है। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने आज बताया कि कांग्रेस ने लखनऊ से प्रत्याशी खडा करने का फैसला किया है।
मान्यता हो सकती हैं उम्मीदवार
संजय दत्त को सुप्रीम कोर्ट से चुनाव लडने की इजाजत नहीं मिलने के बाद उनकी पत्नी मान्यता दत्त को लखनऊ से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। हालांकि, सपा महासचिव अमर सिंह पहले कह चुके हैं कि यदि संजय दत्त चुनाव नहीं लड पाते हैं तो मान्यता को मैदान में उतारा जाएगा। लेकिन माना जा रहा है कि अब स्थितियां बदल चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार "मान्यता" को लेकर पार्टी में मतभेद है। वहीं, कांग्रेस ने भी अब लखनऊ से उम्मीदवार उएतारने का ऎलान कर दिया है। जिसे देखते हुए सपा को "मान्यता" के नाम पर दोबारा विचार करना पड सकता है।
अपराधी नेताओं पर गिरेगी गाज !
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को भारतीय राजनीति में काफी अहम माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह से संजय दत्त की याचिका खारिज की है उससे समाज में यह साफ संदेश गया है कि अपराधियों को राजनीति में किसी भी कीमत पर प्रवेश नहीं मिलेगा। माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राजनीति में अपराधीकरण पर लगाम कसेगी।
जानकारों के मुताबिक यदि आज संजय दत्त को चुनाव लडने की अनुमति मिल जाती तो इस मामले को आधार बनाकर अपनी सजा माफ कराने और चुनाव लडने की अनुमति पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपराधिक छवि वाले और सजायाफ्ता नेताओं की लंबी लाइन लग जाती।



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