नई दिल्ली : देश में साक्षरता और खासकर महिला साक्षरता अभियान को तेज किए जाने पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज कहा कि देश के एक तिहाई लोग निरक्षर हैं और महिलाओं की आधी आबादी लिख पढ़ नहीं सकती है। दुनिया के किसी भी देश की तुलना में भारत में निरक्षरों की तादाद सबसे ज्यादा है।
प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर यहां साक्षर भारत अभियान का शुभारंभ करते हुए ये तथ्य सामने रखे। उन्होंने कहा कि निरक्षरता की स्थिति विशेषकर महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक समुदाय और वंचित वर्गों के बीच बने रहना हमारे लिए चुनौती है जिसका हमें सीधे सामना करना है। उन्होंने कहा, ''हमें अपने देश को पूर्ण साक्षर बनाना है और सरकार देश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए संसाधनों की कमी नहीं होने दी जायेगी।'
मनमोहन ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से भारत को साक्षर बनाने की दिशा में अच्छी प्रगति हुई है। 1950 में जहां मात्र 18 प्रतिशत लोग साक्षर थे वहीं 2001 में 65 प्रतिशत आबादी साक्षर है। उन्होंने कहा, 'लेकिन अभी हमें एक लंबा सफर तय करना है। इस मौके पर आयोजित समारोह में लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल, मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डी. पुरंदेश्वरी और केन्द्रय स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की सचिव अंशू वैश ने भी हिस्सा लिया।'
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इस साल संसद के संयुक्त अधिवेशन में अगले पांच वर्ष के भीतर देश की प्रत्येक महिला को साक्षर बनाने के लिए राष्ट्रीय साक्षरता मिशन को पुनर्गठित करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि देश की महिलाओं का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से सशक्तिकरण करने के लिए उनकी सरकार प्रतिबद्ध है और इसी के तहत पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने के संबंध में संविधान संशोधन करने का निश्चय किया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय महिला कोष को पुनर्गठित और अधिक मजबूत बनाकर स्वसहायता समूह आंदोलन का विस्तार किया जायेगा और साथ ही घोषणा की कि एक राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण मिशन का भी गठन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आम आदमी के सशक्तिकरण और कल्याण के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, सूचना का अधिकार, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, सर्व शिक्षा अभियान और मिड डे मिल जैसी अनेक योजनायें बनाई हैं। इन कार्यक्रमों की सफलता के लिए साक्षरता और विशेषकर महिला साक्षरता केन्द्र बिन्दू है। उन्होंने कहा कि सामाजिक विकास के लिए महिला साक्षरता एक बड़ी ताकत के रूप में कार्य करता है। यह तथ्य सर्वविदित है और इसे दोहराने की जरूरत नहीं है।



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