लखनऊ: अंतरराष्ट्रीय इस्लामी शिक्षण संस्थान दारूल-उलूम '''नदवतुल उलेमा' (नदवा) ने फतवा दिया है कि रमजान के पाक महीने में राजनीतिक दलों द्वारा इफ्तार पार्टियों की कोई धार्मिक मान्यता नहीं है। फतवे में यह भी यह भी बताया गया है कि रमजान के महीने में राजनीतिक दलों द्वारा इफ्तार पार्टियों का आयोजन इस्लाम की मूल भावना के खिलाफ है। इस पार्टी से कोई धार्मिक लाभ नहीं होता है और इनका कोई महत्व नहीं है।
दारुल इफ्तार के मुफ्ती जहूर इदवी ने 18 अगस्त को जारी फतवे में कहा है कि राजनीतिक दल अपने निजी हितों के लिए ऐसी पार्टियों का आयोजन करते हैं, जिसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। सियासी दलों की ओर से आयोजित इफ्तार पार्टियां दरअसल इस्लाम की मूल भावना के अनुरूप नहीं हैं। ऐसे समारोह राजनीतिक दलों द्वारा निहित स्वार्थों के लिए आयोजित किए जाते हैं।
जानकार बताते हैं कि राजनीतिक दलों द्वारा रोजा इफ्तार दावतों की शुरुआत 70 के दशक मे यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा ने की थी। इसके बाद राजनीतिक दलों में रोजा इफ्तार पार्टियों के आयोजन की होड़ सी लगने लग गई।
सूत्रों के अनुसार, कर्नल (सेवानिवृत्त) एम जे शमसी की 'जिज्ञासा' पर संस्थान के फतवा विभाग 'दारूल इफ्ता' के मुफ्ती जहूर नदवी ने कहा, राजनीतिक दलों की ओर से आयोजित होने वाली इफ्तार दावतों की धार्मिक वैधता नहीं है क्योंकि ऐसे आयोजन के पीछे पार्टियों का निजी स्वार्थ छुपा होता है। सूत्रों ने बताया कि कर्नल शमसी ने जानना चाहा था कि राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित रोजा इफ्तार दावतें इस्लामी नुक्तेनजर से कहां तक जायज है।



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