नई दिल्ली: दुनिया भर में भले ही मंदी का दौर हो, कई लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा हो, लेकिन केंद्र सरकार का ताजा दावा कहता है कि भारत में बेरोजगारों की संख्या में कमी आई है। सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में बताया कि दुनिया भर में छाई मंदी के चलते पिछले साल भारत में जो बेरोजगारी पैदा हुई थी उसमें कमी आई है। लेकिन, इसके साथ ही सरकार ने यह भी माना चमड़ा, परिवहन और मेटल जैसे कुछ क्षेत्रों में अभी भी मंदी का असर है।
यह जानकारी श्रम मंत्री मल्लिकार्जुन खरगे ने छंटनी और उद्योग के बंद होने की वजह से बड़े पैमाने पर रोजगार में कमी आने से पैदा हुए हालातों पर वामदलों के सदस्यों के एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जबाव में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि आर्थिक मंदी का असर पूरी दुनिया में है। इसका कुछ असर भारत पर भी पड़ा है। लेकिन, सरकार के उठाए कदमों के सकारात्मक असर नजर आने लगे हैं। भारत में उतने लोगों को अपनी नौकरी से हाथ नहीं गंवाना पड़ा है जितना कि डर जताया जा रहा था। नए रोजगार पैदा करने में भी हमारी स्थिति ठीक ठाक है।
खरगे ने कहा कि अर्थव्यवस्था पर दुनिया भर की इस मंदी के नकारात्मक प्रभाव पर काबू पाने के लिए सरकार ने कर राहत और सार्वजनिक परियोजनाओं पर संवर्धित व्यय के रूप में तीन राजकोषीय प्रोत्साहन पैकेजों की व्यवस्था के साथ ही रिजर्व बैंक ने कई उपाय किए।
उन्होंने बताया कि पिछले साल जब अक्तूबर नवम्बर में नमूना सर्वेक्षण कराया गया था, तो उस रिपोर्ट के मुताबिक पांच लाख रोजगार का नुकसान हुआ। जबकि, इस साल जनवरी से मार्च के बीच कराए गए सर्वे रिपोर्ट बताती है कि खनन, कपड़ा, सूचना प्रौद्योगिकी और रत्न एवं आभूषण जैसे अनेक क्षेत्र में स्थिति में काफी सुधार आया है। रोजगार में कमी नहीं आई है बल्कि अनेक क्षेत्रों में बढोत्तरी ही हुई है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी तरह से कामगारों के हित में काम कर रही है और इसके लिए जो भी कदम उठाना जरूरी होगा सरकार वह कदम उठाएगी। खरगे ने कहा कि वित्त मंत्रालय द्वारा किए गए उपायों के अलावा अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों ने भी वैश्विक मंदी के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार हालात पर बारीक नजर हुए है और मौजूदा हालात का कामयाबी के साथसामना करने के लिए हर मुनासिब कदम उठा रही है। इससे पहले भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के गुरूदास दासगुप्ता ने दावा किया कि आर्थिक मंदी के कारण अपने देश में पचास लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा है और सरकार इस मामले में कुछ नहीं कर रही है।



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