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आवारगी को औरत की आजादी का नाम न दें : आलिम-ए-खवातीन

नूर, 31-Jan-2012 12:55:50 PM
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आवारगी को औरत की आजादी का नाम न दें : आलिम-ए-खवातीन

भोपाल। ताजुल मसाजिद परिसर में आयोजित दो दिनी 12वें खवातीन इज्तिमा का रविवार को समापन हो गया। लगभग 20 हजार खवातीन के मजमे के बीच आलिम-ए-खवातीन ने दीन पर चलने और अल्लाह के हुक्म को मानने की नसीहत देते हुए कहा कि औरतों को शरीअत और इस्लाम के साये में ही जिंदगी बसर करना चाहिए। इसमें ही उनकी भलाई है।

आखिरी और दूसरे दिन का आगाज मोहतरमा अकीका साहिबा के दर्से कुरआन से हुआ। इसके बाद मोहतरमा निदा साहिबा ने ‘आजादी और निस्बा फरेब और नारा’ पर कहा कि आवारगी को औरत की आजादी का नाम दिया जा रहा है। आजादी का ये अर्थ किसी भी तरह से कुबूल नहीं किया जा सकता कि औरत बेबाकी से मर्दो के साथ घुल मिल जाये। व्यावासायिक कारोबार के लिए उसके हुस्नों जमाल को इस्तेमाल किया जाये। आर्थिक उन्नति के नाम पर शैक्षणिक संस्थाओं में बेहयाई और सेक्स को बढ़ावा दिया जाये। मोहतरमा अनीसा साहिबा ने कहा कि इस्लामिक शिक्षा की रोशनी में औरत का लिबास ऐसा होना चाहिए कि उसका बदन पूरी तरह ढंका रहे। घर से बाहर निकलें तो अपनी ‘जीनत’ जेबर, कपड़े और चेहरा आदि को छुपा लेना चाहिए।

निकाह और तलाक का हक पर कनाडा से आए इकबाल मसूद नदवी ने कहा कि इस्लाम में निकाह के लिये जो हुक्म दिये हैं उनका उद्देश्य समाज में रिश्ते-नाते वजूद में लाना है। शरीके हयात के चुनाव में भी यह नसीहत दी गई है कि पैसा और खूबसूरती से ज्यादा सलाहित और चरित्र को महत्व दिया जाये। शादी के बाद पति-पत्नी में निभती नहीं है तो इस्लामिक तलाक का विकल्प खुला हुआ है, ताकि जिंदगी बोझ न बने, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि तलाक देने के जो तरीके शरीयत में बताये गये हैं यदि तमाम कोशिशें नाकाम हो जाती हैं तो आखिरी फैसला तलाक का है। तलाक के बाद दूसरी शादी को इस्लाम मान्यता देता है। हैदराबाद से तशरीफ लाईं नासिरा खानम ने शाम को नेकी पर कायम रहने और शरीयत और इस्लाम के हिसाब से जिंदगी गुजर करने की दुआ करते हुए मौजूद ख्वातीन हजरात को नसीहत दी। इस इज्तिमा में तकरीबन 20 हजार महिलाएं शामिल हुईं।

पीर सईद मियां बने शूरा के सदर

भोपाल। मसाजिद कमेटी ने मजलिसे-ए-शूरा,रूहते हिलाल कमेटी का गठन कर दिया है। कमेटी में शहर के उलेमा-ए-इकराम को शामिल किया गया है। यह दोनों गठित कमेटियां राजधानी में कौम के मसाइल पर फैसला करने के साथ तमाम उन मसलों पर नजर रखने के साथ उन्हें हल करने की कोशिश करेंगी,जिसमें शरीयत,व इस्लाम शामिल है। मसाजिद कमेटी के चेयरमेन हकीम कुरैशी ने बताया कि मसाजिद कमेटी ने मजलिसे-ए-शूरा,रूहते हिलाल कमेटी का गठन कर लिया है। शूरा के सरवरा (सद्र) पीर सईद मियां मुजद्ददी होंगे। जबकि कमेटी में अन्य मेंबरों में मौलाना सईद अहमद नदवी,मुफ्ती अब्दुल रहीम कासमी,मौलाना शराफत अली नदवी और मौलाना शम्स उद्दीन आफरीदी शामिल हैं। कुरैशी ने बताया कि ईद,बकरीद पर चांद देखकर एलान करने वाली रूहते हिलाल कमेटी का गठन भी कर लिया गया है। इस कमेटी के सद्र शहर काजी मौलाना मुश्ताक अली नदवी रहेंगे। कमेटी में अन्य मेंबरों में मुफ्ती अबुल कलाम कासमी,नायब काजी बाबर हुसैन,एडिशनल मुफ्ती रईस अहमद कासमी,मुफ्ती रहीम उल्लाह ,अब्दुल मालिक और मुफ्ती नईम अहमद को शामिल किया गया है।

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