नई दिल्ली। देश के कई प्रतिष्ठित उच्च शैक्षणिक संस्थानों को आधारभूत संरचना की कमी का सामना करना पड़ा रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की उच्च शिक्षा सर्वेक्षण प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, यह बात सामने आई है कि अनेक प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थाओं में जाति आधारित, अशक्त वर्ग और अल्पसंख्यकों से संबंधित आंकड़े नहीं तैयार किए जा रहे हैं। इसमें बताया गया कि अनेक निजी संस्थानों का संचालन ट्रस्ट के माध्यम से हो रहा है और यहां खर्च का कोई रिकार्ड नहीं रखा जाता है, क्योंकि इन आंकड़ों का ब्यौरा ट्रस्ट के पास होता है।
वहीं, एक गैर सरकारी सर्वेक्षण के अनुसार, देश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन दर 12.4 प्रतिशत से बढ़कर 17.1 प्रतिशत हो गया है। दिल्ली और उत्तराखंड इस लक्ष्य को पार कर चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में उच्च शिक्षा सकल नामांकन दर 47.9 प्रतिशत है, जबकि उत्तराखंड का 36 प्रतिशत। 11 राज्य ऐसे हैं जहां सकल नामांकन दर 20 प्रतिशत से अधिक है।
दूसरी ओर, मंत्रलय की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि कई संस्थानों के हास्टल में क्षमता से अधिक छात्र रह रहे हैं। उदाहरण के तौर पर बीएचयू के हास्टलों की कुल क्षमता 7,090 छात्रों की है, जबकि उसमें 12,957 छात्र रह रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के हास्टलों की क्षमता 1,854 की है, लेकिल उनमें 1,922 छात्र रहे रहे हैं। पंजाब विश्वविद्यालय के 3,571 छात्रों की क्षमता वाले हास्टलों में 5,869 छात्र रह रहे हैं।

