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‘नागरिकों में दायित्व-बोध कराने की कला को पत्रकारिता कहते हैं’
‘नागरिकों में दायित्व-बोध कराने की कला को पत्रकारिता कहते हैं’

पलामू, झारखंड: सामाजिक व मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो पत्रकारिता के मूल में मनुष्य की जिज्ञासु प्रवृति छिपी है। दूसरों के विषय में जानने व अपने विषय में बताने की उत्कंठा ने ही पत्रकारिता को जन्म दिया। उक्‍त बातें पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता संजय कुमार पांडेय ने स्वयंसेवी संगठन ‘उद्यमिता एवं कौशल विकास संस्था’ द्वारा पत्रकारिता विषय पर आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि कहीं।

पांडेय ने कहा कि समय और समाज के संदर्भ में सजग रहकर नागरिकों में दायित्व-बोध कराने की कला को पत्रकारिता कहते हैं। गीता में जगह-जगह शुभ दृष्टि का प्रयोग है। यह शुभ दृष्टि ही पत्रकारिता है, जिसमें गुणों को परखना तथा मंगलकारी तत्वों को प्रकाश में लाना सम्मिलित है। उन्‍होंने कहा कि महात्मा गांधी तो इसमें समदृष्टि को महत्व देते थे। समाज हित में सम्यक प्रकाशन को पत्रकारिता कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि असत्य, अशिव व असुंदर पर सत्यम शिवम् सुंदरम् की शंख-ध्वनि ही पत्रकारिता है।

पत्रकार पांडेय ने कहा हिंदी भाषा में पत्रकारिता शब्द पत्र से उत्पन्न हुआ है। प्राचीन भारत में भोजपत्रों पर लिखा जाता था, इसलिए लिखित सामग्री को पत्र कहा गया है तथा पत्र पर समाचार आदि लिखने वाले पत्रकार कहलाए। ज्यों-ज्यों पत्रकारिता का कार्यक्षेत्र विस्तृत होता गया, इसकी परिभाषा में भी बदलाव आता गया। वर्तमान पत्रकारिता केवल समाचारपत्रों व पत्रिकाओं के संपादन व प्रकाशन तक ही सीमित नहीं रही, यह दिन-प्रतिदिन विविधतापूर्ण होती जा रही है। उसमें सामुदायिक या आकर्षक लोकसामग्री का विविध संचार माध्यमों द्वारा प्रसारण भी सम्मिलित है, जिसमें मुख्य रूप से रेडियो और टेलीविजन आते हैं।

पांडेय ने कहा कि नये समाचार पत्र और पत्रिकाओं के प्रकाशन का सिलसिला लगातार जारी है। इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया इसे और विस्तार दे रही है। नये समाचार चैनल जहां ज्यादा से ज्यादा दर्शकों के बीच अपनी पैठ बना रहे हैं, वहीं इस क्षेत्र से जुडने वाले युवाओं की संख्या में तेजी से इजाफा भी हुआ है और अचानक ही हिंदी पत्रकारिता की दुनिया बदल गयी है। उन्‍होंने कहा कि इसकी निगाहें अंतरिक्ष में मंडराते आधुनिक संचार उपग्रहों पर, उंगलियां आधुनिक कंप्यूटर प्रोसेसरों के की-बोर्ड पर है और इसकी जुबान पर एक ऐसी नयी शब्दवली है, जिसका कुछ वर्ष पहले वजूद ही नहीं था। आधुनिक पत्रकारिता अपनी सार्वभौमिकता के उस दौर में है, जहां उसे कोई खतरा नजर नहीं आता। यह जमाना आधुनिक संचार क्रांति का वह युग है, जब किसी भी भाषा को कंप्यूटर से किसी भी दूसरी भाषा में रूपांतरित कर सकते हैं।

पांडेय ने कहा कि आधुनिक पत्रकारिता का आरंभ दरअसल देश की आजादी के बाद शुरू हुआ। आरंभ के लगभग बीस सालों में कोई विशेष तकनीक नही पनपी। बस रंगीन छपाई शुरू हो गई। टेबलॉयड अखबार व पत्रिकाएं खूब पनपीं। इस कार्यशाला में पांडेय ने प्रशिक्षणार्थियों को रिर्पोटिंग विषय के तहत समाचार एकत्र करना, समाचार क्‍या है, समाचार कैसे एकत्र किये जायें, समाचार पाने के स्रोत व प्रकार, समाचार लेखन व शीर्षक देना आदि विषयों की विस्तृत जानकारियां दी।

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