लखनउ: नजाकत, नफासत और तहजीब के शहर लखनउ में उसके सांस्कृतिक परिदृश्यों को दर्शाने वाले लखनउ महोत्सव के उद्घाटन समारोह में न बुलाए जाने से आहत लखनउ के महापौर ने इस समारोह का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
लखनउ के महापौर डा. दिनेश शर्मा ने ’’ भाषा ’’ से बातचीत करते हुए कहा कि जिस शहर लखनउ में ’’ लखनउ महोत्सव ’’ कार्यक्रम हो रहा है, उसी शहर का मै प्रथम नागरिक हूं और इसके उदघाटन समारोह का एक घंटे पहले ही निमंत्रण मिलना, वह भी जिलाधिकारी या अतिरिक्त जिलाधिकारी के हाथों नहीं बल्कि एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी द्वारा, महापौर के पद की गरिमा का अपमान है इसीलिए मैंने इस महोत्सव के समस्त कार्यक्रमों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि लखनउ महोत्सव लखनउ वासियों का कार्यक्रम है लेकिन अब लगता है कि यह अब मात्र अफसरों और नौकरशाहों का उत्सव बन कर रह गया है।
उन्होनें कहा कि पिछले वर्ष भी इसी तरह की गलती की गयी थी और बाद में जिलाधिकारी ने इस गलती को पुन: न दोहराने का वादा किया था, लेकिन इस बार भी उसी गलती को दोहराया गया ।
उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम में मै बहुत आहत हूं और मैने लखनउ के जिलाधिकारी को पत्र लिखते हुए कहा, ‘‘ इस पत्र को व्यक्तिगत न समझकर लोकतांत्रिक मान्यताओं एवं परम्पराओं के संरक्षण हेतु मात्र मेरा स्मरण पत्र माना जाये। ’’ शर्मा ने अपने पत्र में लिखा, ’’ आप जैसे योग्य अधिकारी तथा अन्य श्रेष्ठ अधिकारियों के द्वारा जनप्रतिनिधियों का सम्मान हो, यही अपेक्षा रहती है। वर्तमान प्रकरण मेरे लिए दु:खद व कष्टदायक है। ’’ उन्होंने यह भी बताया कि यह गलती मेरे साथ ही नहीं बल्कि नगर निगम के 120 में से 110 सभासदों के साथ भी दोहरायी गयी और उन्हें भी शाम चार बजे ही निमंत्रण पत्र मिला । उन्होंने कहा कि इससे ऐसा लगता है कि यह भूलवश नहीं वरन जानबूझ कर की गयी गलती है।



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