नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में इन दिनों सिर्फ माया मैम साहब(मुख्यमंत्री मायावती) का हुक्म चलता है, कोई कुछ भी कहे माया मेडम वहीं करती हैं, जो उन्हें करना होता है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से नोटिस मिलने, सीईसी और सुप्रीम कोर्ट में रिट पेंडिंग होने के बावजूद आखिरकार नोएडा में यमुना किनारे बन रहे सेंट्रल पार्क प्लाजा में 11 नई मूर्तियां स्थापित कर दी गई हैं। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में नोएडा निवासी डॉ. आनंद आर्य और कानन जायसवाल की दखलंदाजी अपील पर बेंच ने शुक्रवार को इस मामले में सोमवार को सीईसी के साथ ही सुनवाई करने को कहा है।
शुक्रवार की सुबह तक सभी 11 मूर्तियां लगा दी गई थीं। इनमें 8 मूर्तियां शाहदरा नाले और यमुना पुश्ते के बीच बने तिकोने एरिया में स्थापित की गई हैं, जबकि 2 मूर्ति पार्क के बीचों-बीच हो रहे भव्य चबूतरे और फिल्म सिटी फ्लाईओवर के बीच में स्थापित हुई हैं। एक मूर्ति अलग से लगाई गई है। इन सबके अलावा फिल्म सिटी फ्लाईओवर के क्लोवर लीफ में 8 अप्रैल को भी एक मूर्ति लगा दी गई थी। ये सभी मूर्तियां अभी ढकी हुई हैं। ये मूर्तियां सेक्टर 63 में मूर्तिकार अनिल सुतार ने तैयार की हैं और इनकी ऊंचाई लगभग 18 फुट के करीब हैं। इनमें कबीरदास, संत रविदास, संत घासीदास, बिरसा मुंडा, नारायण गुरु, महात्मा ज्योति फूले, शाहूजी महाराज, गौतम बुद्ध, डॉ. आंबेडकर, कांशीराम और मायावती की प्रतिमाएं शामिल हैं।
राज्य सरकार के आधिकारिक रेकॉर्ड के अनुसार नोएडा अथॉरिटी के अधिसूचित क्षेत्र में लगभग 33.43 हेक्टेयर जमीन पर सेक्टर 95 में सेंट्रल पार्क प्लाजा डिवेलप किया जा रहा है। इसमें राज्य सरकार की ओर से दिए गए आंकड़ों के अनुसार लगभग 9542 वर्ग मीटर एरिया को बिल्ट अप कवर्ड एरिया के रूप में निर्माण किया जा रहा है। इस पार्क को लेकर डॉ. आनंद आर्य व कानन जायसवाल ने सेंट्रल एंपावर्ड कमिटी के सामने एक रिट दायर की है जिसमें इस पार्क से पर्यावरण पर पड़ रहे असर और बर्ड सेंक्चुरी पर मंडरा रहे खतरे के बारे में आगाह किया गया है। इस रिट में यह भी कहा गया था कि यहां पेड़ों की कटाई और बर्ड सेंक्चुरी को डिस्टर्ब करने से एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 और एनवायरमेंट प्रोटेक्शन विनियमावली 1986 के अधीन जारी दिशा निर्देशों का उल्लंघन किया गया है। इसी पर 3 अगस्त को सीईसी और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।
8 जुलाई को सीईसी ने सुनवाई के दौरान इस मामले में केंदीय वन व पर्यावरण मंत्रालय को भी नोटिस भेजकर कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगी है। यहीं नहीं इस पार्क के फिजिकल सर्वे के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के एक अफसर विजिट भी करके गए हैं। स्टेट गवर्नमेंट में कैबिनेट सेक्रेटरी शशांक शेखर ने हाल ही में जारी एक बयान में साफ किया है कि पार्क में किसी भी तरह से पर्यावरण को नुकसान नहीं हुआ और स्टेट एनवायरमेंट इंपेक्ट्स एसेसमेंट अथॉरिटी के सर्टिफिकेट की कोई जरूरत नहीं पड़ती।
इस पार्क के पीछे की अवधारणा देश की राजधानी के पास एक ऐसा सेंटर डिवेलप करने की है, जिसे आने वाले समय में समाज के अंदर परिवर्तन लाने वालों के प्रति आस्था का केंद्र बनाया जा सके। इसमें देश भर के समाज सुधारकों की मूर्ति लगाने के साथ ही उनसे जुडे़ प्रशंसकों की भावनाएं भी जुड़ेंगी। यहीं नहीं इसे यमुना के दूसरे किनारे पर बने गांधी नेहरू प्रशंसकों से अलग पावर का नया सेंटर बनाने की भी कोशिश की जाएगी।




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