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माओवादियों को रोकना ही होगा
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Posted On: 24-Oct-2009 16:06:01 Source: शिखा शर्मा Font Size:

नई दिल्ली : एक अपह्रत अधिकारी को माओवादियों के चुंगल से छुड़ाकर यदि पुलिस सोच रही है कि उन्‍होंने माओवादियों को करारी हार दी है, तो पश्चिम बंगाल सरकार को ये समझ लेना चाहिए कि आने वाले समय में ये माओवादी किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते है, इसलिए सही समय पर इन्‍हे रोकना ही होगा। माओवादियों को बड़ी मात्रा में हाथियारों की सप्‍लाई कहां से, कब और कौन करवा रहा है, इसकी जानकारी हासिल करना बहुत जरूरी है, अब तो स्‍वयं केंद्रीय गृहमंत्री पी चिंदबरम ने भी कहा है कि माओवादी बांग्लादेश, म्यांमा और संभवतः नेपाल से हथियार हासिल कर रहे हैं।

चिदंबरम ने एक विशेष साक्षात्कार में नक्सलवाद को भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए उन बुद्धिजीवियों पर प्रहार किया, जो नक्सलवादियों की रूमानी तस्वीर पेश करते हैं। गृहमंत्री ने कहा कि सरकार पर्याप्त व्यवहारिक है और समझती है कि नक्सलवादी हथियार नहीं डालेंगे।

गृहमंत्री ने कहा, ‘भारतीय स्रोतों या आंतरिक स्रोतों से सुरक्षा को खतरे के संदर्भ में नक्सलवाद सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। बेशक अन्य खतरा सरहद पार से आतंकवाद है, लेकिन वह सरहद पार से आ रहा है।‘ चिदंबरम ने कहा, ‘विदेशों से माओवादियों के लिए धन के किसी प्रवाह का कोई साक्ष्य नहीं है। लेकिन, निश्चित रूप से, म्यांमा या बांग्लादेश के माध्यम से विदेश से हथियारों की तस्करी के निश्चित रूप से साक्ष्य हैं, जो माओवादियों के पास पहुंचते हैं।‘

चिदंबरम से जब पूछा गया कि क्या इसका पाकिस्तान से कोई संबंध है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी पुष्ट सूचना नहीं है कि हथियारों की उत्पत्ति कहां से होती है। उन्होंने कहा, ‘हम अभी जानते हैं कि हथियार बांग्लादेश और म्यांमा और संभवतः नेपाल के मार्फत आ रहे हैं।‘ केन्द्रीय गृहमंत्री ने कहा कि पुलिस ने पाकिस्तानी निशान वाला कोई हथियार नहीं पाया है। चिदंबरम ने कहा, 'माओवादियों ने ‘हमारे अपने अस्त्रागार‘ लूटे हैं।' माओवादियों ने खुद भी कहा है कि पश्चिम बंगाल में सांखरैल पुलिस थाने पर हमले के पीछे उनका उद्देश्य हथियार और धन लूटना था। उन्होंने कहा, ‘इस बयान के बाद भी अगर लोग नक्सलवादियों की रूमानी तस्वीरें पेश करते हैं, तो मैं बस यही कह सकता हूं कि सिर्फ ईश्वर ही उनकी मदद कर सकते हैं।‘

लालगढ़ आपरेशन के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने ‘‘बहुत देर से सबक सीखा‘। लेकिन यदि सरकार अब भी नहीं जागी तो हो सकता है कि आने वाले समय में ये माओवादी किसी बड़ी घटना को अंजाम दे दें।

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