भोपाल। मध्यप्रदेश में हाल का विधानसभा चुनाव जीतकर शिवराज सिंह भले ही अपनी दूसरी पारी शुरू कर दी हो, लेकिन आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के पास ऐसा कोई मुद्दा नहीं है, जिसके सहारे पार्टी केंद्र की सत्ता तक पहुंचने के लिए तैयारी करे। यही कारण है कि रविवार को पचमढ़ी में आयोजित मंत्रियों की क्लास में भाजपा की चुनाव समिति के प्रमुख एम वेंकैया नायडू ने शिव सरकार के लिए जनता के बीच अपनी छवि बनाने के लिए 100 दिनों का टारगेट दिया है।
वेंकैया ने कहा कि किसी सरकार की छवि को बनाने और बिगाड़ने का काम मंत्रियों के ही हाथ होता है, क्योंकि पार्टी के कार्यक्रमों, नीतियों को जनता के बीच ले जाने का काम उन्हीं से जिम्मे है।
इस संदेश से साफ है कि पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव की ही तरह आगामी संसदीय चुनाव में भी शिवराज सरकार के काम को ही भुनाने की कोशिश करेगी। लेकिन इस संदेश में यह बात भी छिपी है कि पार्टी नेतृत्व कहीं न कहीं शिव के गणों यानी मंत्रियों के कामकाज से खुश नहीं है। शिवराज के पिछले कार्यकाल में भी मंत्रियों की निष्िक्रयता को लेकर आलाकमान ने मुख्यमंत्री की काफी खिंचाई की थी। खुद शिवराज को भी इसी बात को लेकर चुनाव में पराजय का खतरा लगने लगा था, लेकिन कांग्रेस की कमजोरी ने उनकी नैया किसी तरह से पार लगा ही दी।
अब दूसरी पारी में शिवराज ने प्रशासनिक सख्ती बरतने के संकेत तो दिए हैं, लेकिन मंत्रियों पर जिस कदर भ्रष्टाचार और निष्िक्रयता के आरोप लग रहे हैं, उनके चलते पार्टी आलाकमान को ऐसा कोई मुद्दा नजर नहीं आ रहा है, जिसके सहारे पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर सके।
अपने पहले कार्यकाल में शिवराज राज्य की नौकरशाही पर अंकुश नहीं लगा सके थे। इसके कारण सरकार की योजनाओं की पहुंच आम आदमी तक नहीं हो सकी। उनकी दूसरी पारी में भी लग रहा है कि इस मोर्चे पर वे फिर से ढीले पड़ते नजर आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कार्यशाला में वेंकैया ने न सिर्फ मंत्रियों को, बल्िक मुख्यमंत्रियों को भी इस मामले में सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
वेंकैया ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर शिवराज इसमें नाकाम होते हैं तो आलाकमान को मजबूरन राज्य में व्यापक स्तर पर सर्जरी का सहारा लेना पड़ सकता है।




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