नई दिल्ली: भारत में मंदी को लेकर माकपा नेता सीताराम येचुरी ने एचटी लीडरशिप समिट में अपनी पीठ थपथपाते हुए कहा कि अगर लेफ्ट ने सरकार को कुछ आर्थिक नीतियों को लागू करने से नहीं रोका होता तो भारत भी मंदी से बुरी तरह प्रभावित होता।
माकपा नेता ने याद दिलाया कि यदि उनकी पार्टी बैंकिंग, पेंशन फंड क्षेत्र को खुला बनाने, रुपये की पूर्ण परिवर्तनीयता और बीमा क्षेत्र के निजीकरण जैसे मुद्दों पर संप्रग की पहली सरकार को रोका नहीं होता तो आज वैश्विक मंदी के काफी बुरे परिणाम भारत को भुगतने पड़ रहे होते। उन्होंने कहा कि देश दो वर्गों में विभाजित हो गया है, एक शाइनिंग और दूसरा सफरिंग। शाइनिंग और सफरिंग (खुशहाल और परेशान हाल) के बीच के अंतर को पाटने की जरूरत है।
माकपा नेता ने संसदीय लोकतंत्र में उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने की व्यवस्था की बजाए आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली लागू करने की जोरदार वकालत करते हुए कहा कि इससे चुनावों में धन, बाहुबल और जातिगत राजनीति का असर खत्म होगा।
माकपा पोलितब्यूरो सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली पर विचार किया जाना चाहिए क्योंकि इससे हमारे लोकतंत्र में व्याप्त कई खराबियों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि आज हम देखते हैं कि राजनीति में धन, बाहुबल, क्षेत्रीयता और जातिवाद का बोलबाला है। अगर आनुपातिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था लागू कर दी गई तो इन सब पर अंकुश लगेगा क्योंकि तब वोट व्यक्ति को नहीं बल्कि पार्टी को मिलेगा।
येचुरी के साथ मंच पर मौजूद भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने इस सुझाव पर कहा कि येचुरी जी ने आज यह मुद्दा उछाला है। हमने अभी इस बारे में पार्टी में कोई चर्चा नहीं की है। इस पर विचार करने के बाद ही हम अपनी कोई राय बताएंगे। आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली में जिस पार्टी को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसके हिसाब से उसे संसद में प्रतिनिधित्व मिलता है।



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