नई दिल्ली: पाकिस्तान के लाहौर उच्च न्यायालय ने जमात-उद-दावा (जेयूडी) प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ आतंकवाद निरोधक अधिनियम के तहत दायर प्राथमिकी को खारिज कर दिया। इसके साथ ही सईद एक बार फिर से आजाद हो गया।
हाफिज सईद पर मुम्बई में 26 नवम्बर 2008 को हुए आतंकवादी हमलों का षड्यंत्र रचने का मुख्य आरोपी है। पाकिस्तान से समुद्र के रास्ते आए आतंकवादियों के एक गिरोह ने मुम्बई में विभिन्न स्थानों पर खूनी हमले कर 150 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।
भारत ने कई बार सईद के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। भारत ने मुंबई हमलों में सईद का हाथ होने और उसके द्वारा मुंबई में कत्लेआम मचाने वाले आतंकवादियों को प्रशिक्षण दिए जाने के ठोस सबूत पाकिस्तान को दस्तावेज के रूप में सौंपे थे। फिर भी समय समय पर पाकिस्तान यह कहता रहा कि भारत ने उसे मुंबई हमलों के बारे में पर्याप्त सबूत नहीं दिए हैं।
इंटरपोल ने भी मुम्बई हमले के मास्टरमाइंड सईद के खिलाफ मुम्बई की एक विशेष अदालत द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी करने के बाद रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर दिया था।
हाफिज सईद आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक था। लश्कर पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद वह जमात-उद दावा नामक नए संगठन की आड़ से अपनी विध्वंसक गतिविधियां चलाने लगा।
मुंबई हमलों से जुड़े आतंकवादी संगठनों पर कार्यवाही करने का पूरी दुनिया से दबाव पड़ने के बाद पाकिस्तान ने सईद को कथित तौर पर नजरबंद किया था, लेकिन लाहौर हाईकोर्ट ने यह कह कर उसे रिहा कर दिया कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं।
इसके पहले भी लाहौर उच्च न्यायालय ने एक –एक कर मुंबई हमले के अन्य आरोपियों को रिहा कर दिया था।



<< पिछला अगला >>