नई दिल्ली : परमाणु कार्यक्रमों के विस्तार में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग करते हुए भारत ने आज कहा कि परमाणु ऊर्जा के फायदे वर्ग विशेष तक सीमित नहीं रहने चाहिए क्योंकि यह विकासशील देशों की बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए आवश्यक है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आईएईए के प्रमुख मोहम्मद अल बरदेई को इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार दिए जाने के मौके पर कहा, 'जरूरत है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय एकजुट होकर प्रयास करे ताकि परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को हरसंभव प्रोत्साहित किया जा सके।'
उन्होंने कहा कि भारत अब अपने परमाणु कार्यक्रम में उल्लेखनीय विस्तार करने वाला है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रमुख भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा भारत जैसे विकासशील देशों की ऊर्जा और विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका फायदा कुछ विशेषिधकार प्राप्त लोगों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। मनमोहन ने आगाह किया कि परमाणु ऊर्जा का विकास इसका दुरुपयोग कम करने की कोशिश के साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि परमाणु सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक भरोसा मजबूत करना चाहिए।
अल बरदेई को 25 लाख रुपए का पुरस्कार प्रदान करते हुए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा कि भारत की व्यापक परमाणु निरस्त्रीकरण और गैर बराबरी के खिलाफ प्रतिबद्धता जगजाहिर है।
परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण प्रयोग सुनिश्चित करने की अल बरदेई और आईएईए की कोशिश की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का आईएईए के साथ दीर्घकालिक संबंध बेदाग रहा है। आने वाले दिनों में आईएईए की भूमिका न सिर्फ परमाणु ऊर्जा और इसके उपयोग जैसे पारंपरिक क्षेत्र में ही नहीं बढ़ेगी बल्कि परमाणु खतरों के खिलाफ देशों को अपने आपको सुरक्षित बनाने में भी मदद करेगी।



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