नई दिल्ली:
कांग्रेस के पूर्व सांसद मणि कुमार सुब्बा की नागरिकता से जुड़े मामले में सीबीआई ने अपनी ताजा रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी है। असम से सांसद रहे सुब्बा की भारतीय नागरिकता संदेह के घेरे में है। सीबीआई ने अपनी शुरुआत जांच में उनके जन्म संबंधी उनके दावे को फर्जी पाया गया था।
सुब्बा ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर जांच एजेंसी के शुरुआती निष्कर्षो पर सवाल खड़ी की थी। उसके बाद सीबीआई ने अपनी ताजा रिपोर्ट सोमवार को सीलबंद लिफाफे में अदालत में दाखिल की। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी शुरुआती जांच में सुब्बा के इस दावे को नकार दिया था कि उनका जन्म पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी जिले में हुआ था।
सुब्बा ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में यह दावा किया था कि उनका जन्म 16 मार्च 1958 को सिलीगुड़ी के दाब्ग्रा में हुआ था। सुब्बा ने कहा था कि दार्जिलिंग के ददग्राम गांव के रहने वाले हैं और उनके माता-पिता सिक्किम के सिंगताम गांव से वहां जाकर बस गए थे।
सीबीआई ने अपनी शुरुआती जांच में सुब्बा के जन्म प्रमाणपत्र को फर्जी करार दिया था। सीबीआई का कहना था कि जिस स्थान का जिक्र सुब्बा अपने जन्मस्थान के तौर पर कर रहे हैं वह दरअसल, अस्तित्व में ही नहीं है।
कांग्रेसी नेता हाल ही में समाप्त हुए लोकसभा चुनाव में अपनी तेजपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। सुब्बा ने सीबीआई द्वारा 10 दिसंबर 2007 को अदालत में उनकी नागरिकता को लेकर दाखिल सत्यापन रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस साल जनवरी में सुब्बा की उस याचिका को मंजूर कर लिया था जिसमें मामले की आगे जांच कराने का अनुरोध किया गया था।
मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन और जस्टिस पी सथसिवम की पीठ ने सीबीआई की ताजा रिपोर्ट अदालत के रिकार्ड में शामिल कर ली है। पीठ ने इसके बाद कहा कि रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद ही मामले पर किसी तरह के निर्देश जारी किए जाएंगे।
यहां यह बात भी ध्यान देने वाली है कि नोएडा निवासी बीरेंद्र नाथ सिंह द्वारा वर्ष 2005 में सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में सुब्बा की भारतीय नागरिकता को संदिग्ध बताया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन लोकसभा सांसद और लाटरी व्यवसायी सुब्बा नेपाल में हत्या के एक मामले में नामजद होने के बाद 1970 के दशक की शुरुआत में भारत आकर बस गए थे।




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