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झारखंड के एक इलाके में लगता है भूत-प्रेत का मेला
Posted On : 26/10/ 2009 Bookmark and Share

झारखण्ड राज्य का अतिपिछड़ा पलामू जिला के हुसैनाबाद प्रखण्ड स्थित हैदरनगर देवी धाम का इतिहास काफी पुराना है। सौ वर्ष पूर्व एक झोपड़ीनुमा मंदिर आज भव्य धाम के रूप में विकसित हो चुका है। वाराणसी के प्रतिष्ठित व्यवसायी भगतमाल साव को मुंह से मल आने की बीमारी थी। उन्होनें चिकित्सकों व वैद्यों से काफी इलाज कराया, लेकिन इस बीमारी से निजात नहीं मिली। तब वे हैदरनगर देवीधाम स्थित माँ के दरबार में अपनी फरियाद लेकर पहुंचे। उनकी यह बीमारी चंद दिनों में ही ठीक हो गयी। उन्होनें उसी समय संकल्प किया था कि उनकी बीमारी ठीक हो जाने पर वे मंदिर को भव्य रूप देगें व यहीं रहकर मां की सेवा करेंगे। मेले ने विस्तृत रूप तब लिया जब जम्होर (औरंगाबाद) से हलवाइयों का दल हैदरनगर आया। इन हलवाइयों के दल में एक ओझा भी था। जिसके हजारों अनुयायी थे, तब से ही इस मेले ने भूतमेले का रूप लिया। देवीधाम परिसर दो एकड़ भूमि में स्थित है। चैत्रमास में यह मेला प्रतिपदा से पूर्णिमा तक एक पखवाड़े लगता है। जिसमें लाखों श्रद्धालु झारखण्ड राज्य के कोने-कोने से आते हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार व उड़ीसा के सीमावर्ती इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग आते हैं। यहां आने वाले लोगों को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। यहां आने का एक मात्र साधन रेल है, क्योंकि सड़कों की स्थिति काफी बदतर है। यहां आने वाले लोगों को रहने का एक मात्र साधन खुला आकाश है। वे टेंट वगैरह लेकर यहां आते है। झारखण्ड राज्य पर्यटन विभाग ने हैदरनगर देवीधाम को पर्यटन स्थल के रूप में मान्यता दी गयी है। पलामू उपायुक्त द्वारा सरकार को सभी आवश्यक प्रतिवेदन भी भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक सरकार द्वारा कोई प्रगति देखने को नहीं मिली है। लेकिन आधिकारिक सूत्र बताते है कि देवीधाम को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए योजना बनाकर सरकार को भेज दी गयी है। राशि उपलबध होने के बाद कार्य प्रारम्भ हो जायेगा। मेले में फिलहाल जो भी व्यवस्था की जाती है वह देवीधाम विकास समिति द्वारा की जाती है ।

आज इंटरनेट के युग में भी लोग भूत-प्रेत को मानकर परेशान रहते हैं । देश, समाज व राज्य के लिए सोचनीय है। इस भूत-प्रेत के मेले में आने वाले लोगों को जागरूक करने का न तो प्रशासन ने कोई उपाय व भगतिन के साथ तीस से पच्चास महिलायें प्रेत
बाधा से मुक्ति पाने और डायन की सिद्धि प्राप्त करने आती हैं। उनकी मान्यता है कि कथित भूत-प्रेत से देवी मां मुक्ति दिला देती है।

चैत्र मास में यह मेला एक पखवाडे़ पूर्णिमा तक रहता है। प्रतिपदा से पूर्णिमा तक लगने वाले इस मेले में एक ओर जहां ओझा-गुणियों की चांदी है, वहीं मंदिर परिसर के दुकानदार, हलवाई और कुछ पुजारी किस्म के लोग मालामाल हो रहें है। जिन लोगों पर कथित भूत-प्रेत व जिन्न की छाया रहती है, जिन्हें संतान नहीं होता, घर में सुख शांति नहीं रहती, वे गांव के ओझा-गुणियों के जाल में पड़ जाते है। ओझा-गुणी उन्हें हैदरनगर देवीधाम चलने की सलाह देते है । कथित भूत-प्रेत से पीड़ित व्यक्ति ज्यों ही देवी मां की अग्नि कुण्ड के सामने आते है, वहां झुमना व देते हैं। वहां ओझाओं द्वारा कुछ मंत्राच्चारण किया जाता है। इससे पीड़ित स्त्री-पुरूष दरसने (बोलने) लगते हैं । वह बोलता है कि उस पर कौन सवार है या उस पर किसने जादू-टोना किया है। नहीं बोलने वालो को ओझाओं द्वारा यातनायें भी दी जाती है। ओझा उससे जबरदस्ती कहता है कि तुम अपना स्थान ले लो और इस जीव को छोड़ दो इसके बदले बकरा या मुर्गा का जीव ले लो। ओझाओं के अनुसार भूत-प्रेत को जगह देने के लिए कई स्थान है। इनमें धाम परिसर में ही जिन्न बाबा का चैक, एक किलोमीटर दूर करबला व तीन किलो मीटर दूर जिन्न ताड़ का स्थान है।

धाम परिसर में भी अनेकों स्थान कथित भूत-प्रेत को बैठाने के लिए है। हैदरनगर देवीधाम की एक और खासियत है कि यहां खास हलवाईयों द्वारा बनाई गयी चीनी की मिठाईयां चढ़ाई जाती है।

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