लखनऊ। कैग ने अपनी रिपोर्ट में यूपी के सबसे बडे शराब कारोबारी गुरदीप सिंह ऊर्फ पोंटी चढ्ढा और मुख्यमंत्री मायावती के सम्बन्धों के साथ यह भी खुलासा किया है कि दोनों की मिलीभगत से सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों को औने-पौने दाम में बेच कर राज्य को किस तरह 25 हजार करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया गया।
माया के कार्यकाल में सहकारी क्षेत्र की 21 चीनी मिलें बेची गयीं, जिसमें पांच पोंटी की कंपनी ग्रुप वेव इंडस्ट्री और पीबीएस फूड प्राईवेट लिमिटेड को काफी कम कीमत पर दी गई। छह कंपनी इंडियन पोटास और बाकी बची 11 चीनी मिले बसपा के करीबी उद्योगपति को मिली। चीनी मिलों को कम कीमत पर बेचने से राज्य को 25 हजार करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ। कैग की रिपोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी पेश की गई हैं, जहां चीनी मिलों को कम कीमत पर बेचने को लेकर दायर याचिका पर छह फरवरी को सुनवाई होनी है।
कैग ने अपनी रिपोर्ट में पिछले दो दिन तक आयकर के छापे में करोड़ों रुपए की बरामदगी के कारण चर्चा में आए पोंटी चढ्ढा के साथ मुख्यमंत्री मायावती के संबंधों का भी खुलासा किया है। रिपोर्ट कहती है कि चीनी मिलों को जान-बूझकर कम कीमत पर बेचा गया ताकि उद्योगपतियों समेत इसे खरीदने वालों को लाभ मिले। बिक्री वाली चीनी मिलों की जमीन और मशीन की कीमतें बाजार दर से काफी कम रखी गई।
कैग की रिपोर्ट कहती है कि बिक्री में पारदशिर्ता नहीं रखी गई और निविदा जारी करने में भी हेराफेरी हुई। निविदा को मंजूर करने में नियमों को ताक पर रख दिया गया। निविदा में बिड़ला, डालमिया, सिबोली, धामपुर शुगर और मोदी जैसे चीनी मिल चलाने में अपनी साख रखने वाले उद्योगपति शामिल हुऐ थे, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इन बड़े उद्योगपतियों ने अपनी निविदा वापस ले ली।

