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कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं: चीन
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प्रकाशन तरीख : 19-Oct-2009 19:12:16 स्त्रोत: एजेंसी Font Size:

काठमांडू: भारत के प्रति चीन का आक्रामक और शत्रुतापूर्ण रवैया जारी है। जम्मू-कश्मीर के पासपोर्ट धारकों को चीन आने के लिए अलग से वीजा जारी किए जाने के बाद चीन अब भारत के अखंड क्षेत्र कश्मीर को दूसरे तरीकों से भी विवादित इलाका घोषित करने पर आमादा है। चीन की इस हरकत का पता इसी से चलता है कि वह तिब्बत भ्रमण पर आने वाले लोगों, खासकर चीनी सरकार द्वारा आमंत्रित किए गए पत्रकारों को ऐसे हैंड आउट्स दे रहा है जिसमें जम्मू-कश्मीर को एक अलग देश के रूप में दर्शाया गया है।

तिब्बत, जिस पर चीन ने 1950 में हमला कर कब्जा कर लिया था, के बारे में 'बुनियादी बातों की जानकारी' देने वाले मीडिया किट्स में कहा गया है कि तिब्बत की सीमा भारत, नेपाल, म्यांमार और कश्मीर इलाके से मिलती है।

इसमें कहा गया है कि केवल 'कश्मीर इलाके' को छोड़कर बाकी तीन मुल्क संप्रभु देश हैं। चीन, म्यांमार और नेपाल में उपलब्ध नक्शों में भी भारत को कश्मीर के बिना दिखाया गया है।

इसके अतिरिक्त चीन की केवल किसी देश की सरकार को मदद देने की नीति से पता चलता है कि वह भारत के परमाणु प्रतिद्वंद्वी और पड़ोसी पाकिस्तान के बारे में समझता है कि उसका कश्मीर के ऊपर कब्जे वाले क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण है। यही वजह है कि उसने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सिंधु नदी पर एक डैम बनाने के लिए पाक को वित्तीय सहायता की पेशकश की है।

भारत के साथ सीमा विवाद में उलझे चीन को भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा पर भी ऐतराज है। उसका मानना है कि तिब्बती प्रदर्शनकारियों को भारत से नेपाल में घुसकर चीन विरोधी प्रदर्शन का मौका मिलता है।

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      देखें 1-1 of 1 टिप्‍पणी
       Dr. Purushottam Meena ने कहा 19-Oct-2009 20:05:55
    चीन की हरकतों के लिये हमारे पूर्वज जिम्मेदार हैं.भारत की नपुंसक सरकारों और हिन्दू धर्म के नाम पर हमें सिखाई गयी सहिष्णुता को सारी दुनिया हमारी कमजोरी मानती हैं. हमें अपने सांस्कृतिक चरित्र को बदलना होगा और जैसे को तैसा की नीति पर काम करना होगा, लेकिन इसमें देश में व्याप्त भ्रष्टाचार और मानव-मानव में भेदभाव करने की सरकार की एवं प्रशासन की नीति में तत्काल बदलाव की जरूरत है. हमारी आंतरिक एवं बाहरी नीतियां नौकरशाही पर निर्भर हैं और नौकरशाही की दशा बेहद ख़राब है.
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