नई दिल्ली: भारत में सड़कों की बुरी हालत किसी से छुपी नहीं है। यहां सड़कों में गढ्ढे नहीं बल्कि इसके उलट होता है। यह हाल गांव की सड़कों का ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्गों का भी यही हाल है।
इससे निपटने के लिए सरकार ने 2009-10 में राष्ट्रीय राजमार्ग की 12000 किलोमीटर सड़कें बनाने पर 1,00000 करोड़ रुपए का निवेश करने की योजना बनाई है। उम्मीद की जा रही हे कि इससे देश की सड़कों की हालत सुधरेगी। इस योजना के लिए धन इक्विटी एवं ऋण दोनो रास्तों अपनाया जाएगा।
इस बारे में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री कमलनाथ के पास योजना है। कमलनाथ ने कहा कि इस योजना पर खर्च होने वाले धन का करीब 60 फीसदी हिस्सा सड़क चुंगियों के जरिए इकट्ठा किया जाएगा। बाकी रकम एन्यूटि एवं ईपीसी से बराबर-बराबर हिस्सों में आने की संभावना है।
कमलनाथ ने कहा, ‘’हम योजनाओं पर काम कर रहे हैं। करीब 60 फीसदी निवेश चुंगियों के जरिए आएगा और आधा हिस्सा एन्युटि एवं ईपीसी से आएगा।‘’ उन्होंने यह भी कहा कि देश में परियोजनाओं के लिए धन इकट्टा करने के लिए दुनिया भर के निवेशकों की मदद की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश में ढांचागत परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के साथ सरकार की योजना, अनूठी बोली मॉडल अपनाने की है।
कमलनाथ ने कहा कि निवेशकों को आकर्षित करने की योजनाएं बनाई जा रही हैं। परिवहन मंत्री ने कहा, ‘’हम उन मॉडलों पर काम कर रहे हैं जो निवेशकों को आकर्षित कर सकें। इसका लक्ष्य बोली मॉडलों में सुधार लाना और ठेकों को निवेशकों के अनुकूल बनाना है।'''




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