अविश्वास और टकराव के लंबे दौर के बाद अमेरिका ने बुधवार को कहा कि वह तेल से मालामाल ईरान के साथ दोस्ती चाहता है। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बुधवार को कहा, मैंने यह साफ कर दिया कि अमेरिका इस अतीत से आगे जाना चाहता है और परस्पर हितों व परस्पर सम्मान के आधार पर इस्लामी गणराज्य ईरान के साथ रिश्ता बनाना चाहता है।
ओबामा ने तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जे की 30वीं बरसी के अवसर पर जारी एक बयान में कहा, हम ईरान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देते। ओबामा का यह बयान ईरान की मुख्य भाषा फारसी में भी जारी किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, चार नवंबर 1979 को शुरू हुए (दूतावास प्रकरण के) 444 दिन ने बहादुर अमेरिकियों के जीवन को बहुत प्रभावित किया जिन्हें अनुचित रूप से बंधक बनाया गया था, और हम इस असाधरण सेवा एवं कुरबानी के लिए इन अमेरिकियों और उनके परिवार के आभारी हैं।
ओबामा ने कहा, इस घटना ने अमेरिका और ईरान को टिकाऊ शक, अविश्वास और टकराव की राह पर धकेला। ओबामा ने कहा कि अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता। उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन ने ईरान में आतंकी हमलों की भर्त्सना की है।
अपने बयान में ओबामा ने कहा, शांतिपूर्ण परमाणु शक्ति के रूप में ईरान के अंतरराष्ट्रीय अधिकार का हम सम्मान करते हैं। विश्व समुदाय के अन्य देशों के साथ हमने विश्वास बहाली के प्रयासों के प्रति हमने अपनी इच्छा प्रकट की है। ओबामा ने कहा, ईरान के अनुरोध पर ईरानी जनता की चिकित्सीय जरूरतों और अन्य मदद को पूरा करने के लिए हमने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रस्ताव को स्वीकार किया है।
ओबामा ने कहा, हमने साफ कर दिया है कि हर राष्ट्र की तरह ईरान अपने दायित्वों को पूरा करता है तो यह उसे समृद्धि की राह पर प्रशस्त करेगा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सकारात्मक संबंध बनाएगा।
उन्होंने कहा ईरान को इस पर निर्णय करना है। ओबामा ने कहा कि फैसला ईरान सरकार को करना है कि वह अतीत के मुद्दे से ही जूझना चाहता है या अपने देश के लिए अवसर, समृद्धि तथा न्याय का एक व्यापक द्वार खोलना चाहता है।



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