नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी और मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी दोनों शनिवार को एक मंच पर एक साथ मीडिया पर बरसे। दोनों ने संसद की कार्यवाही की रिपोर्टिग के बारे में मीडिया की आलोचना की। भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने आरोप लगाया कि मीडिया सिर्फ शून्यकाल की चटपटी खबरें दिखाने में दिलचस्पी रखता है, वहीं माकपा के सीताराम येचुरी ने संसद के शून्यकाल की कार्यवाही का सीधा प्रसारण बंद किए जाने का सुझाव दिया।
दोनों नेताओं ने यह बात हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में 'सराहना और आलोचना के बीच विपक्ष की भूमिका' विषय पर परिचर्चा में कही। येचुरी ने कहा कि संसद को बार-बार होने वाले विघ्न और स्थगन से बचाने के लिए कुछ दिन के लिए उसकी कार्यवाही विशेष तौर पर शून्यकाल की कार्यवाही का सीधा प्रसारण बंद करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज जब संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण हो रहा है तो ऐसे में दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों द्वारा आपत्तिजनक सामग्रियों को कार्यवाही से निकालने का फैसला बेमानी हो जाता है।
येचुरी ने कहा कि कई सदस्य केवल प्रचार पाने के लिए संसद की कार्यवाही में बाधा डालते हैं, इसलिए अगर संसद के कामकाज का सीधा प्रसारण रोक दिया जाए, तो ऐसी प्रवृत्तियों पर अंकुश लग सकेगा।
उधर, भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने शिकायत की है कि मीडिया ने संसद की पूरी रिपोर्टिग को महज 'शून्यकाल की रिपोर्टिंग' तक सीमित कर दिया है। उन्होंने कहा कि किसी महत्वपूर्ण विषय पर किसी सदस्य के घंटा भर बोलने के बावजूद मीडिया में यदि उसका एक वाक्य में भी उल्लेख हो जाए तो सदस्य अपने आपको धन्य मानता है, लेकिन यदि उसी विषय पर संसद की कार्यवाही स्थगित हो जाए या बाधा आए या सदस्य अध्यक्ष के आसन के सामने आ जाएं तो मीडिया उस खबर को सुर्खियां बना देता है। सुषमा ने कहा कि सदन की कार्यवाही को बाधित करने के लिए 'कुएं में कूदने (आसन के सामने जाने) के लिए' मीडिया हमारी कड़ी आलोचना करता है, लेकिन उसे देखना चाहिए कि विपक्ष ऐसा करने को क्यों मजबूर होता है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किसानों की आत्महत्या, मंहगाई और शर्म अल शेख में पाकिस्तान और भारत के संयुक्त बयान में बलूचिस्तान के उल्लेख जैसे गंभीर मसलों को नहीं उठाने देने पर ही विपक्ष को ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं।
हालांकि सुषमा ने आरोप लगाया कि मीडिया सिर्फ चटपटी खबरों को ही खबर मानता है और उसकी इस प्रवृत्ति ने विपक्ष की भूमिका बिगाड़ी है। एचुरी ने कहा कि केवल पब्लिसिटी के लिए ही संसद की कार्यवाही में बाधा पहुंचाना गलत है।



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