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विश्व पुस्तक मेला : किताबों की अधिकता फिर भी हुआ कम व्यवसाय
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Posted On: 08-Feb-2010 05:00:09 AM By: मधुश्री चटर्जी Font Size: Increase Font Size Decrease Font Size
विश्व पुस्तक मेला : किताबों की अधिकता फिर भी हुआ कम व्यवसाय
विश्व पुस्तक मेला : किताबों की अधिकता फिर भी हुआ कम व्यवसाय

नई दिल्ली: देश के 19वें विश्व पुस्तक मेले में आने वाले पुस्तक प्रेमियों की संख्या अंतिम समय में काफी बढ़ गई थी लेकिन कई प्रकाशकों ने कम बिक्री और पर्याप्त व्यवस्था न होने की शिकायतें की हैं।

प्रगति मैदान में एक से आठ फरवरी तक आयोजित इस मेले में एक गैर सरकारी अनुमान के मुताबिक अंतिम तीन दिनों में 30,000 किताबों की बिक्री हुई। किताबों की बिक्री का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया है।

मेले का आयोजन करने वाले नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) के अध्यक्ष बिपिन चंद्रा ने कहा कि यह मेला पिछले वर्ष की अपेक्षा अधिक बड़ा था लेकिन नए उभरते हुए रुझानों का विश्लेषण मुश्किल है।

उन्होंने कहा कि यह कहा जा सकता है कि अब बच्चे पहले की अपेक्षा अधिक किताबें पढ़ते हैं। इस बार देश के विभिन्न राज्यों की विज्ञान पुस्तकें और बच्चों की किताबें अधिक लोकप्रिय रहीं।

मेले में 1,200 भारतीय और विदेशी प्रकाशकों की किताबें थीं लेकिन कई भारतीय प्रकाशक नाखुश रहे।

दरियागंज के सीरियल प्रकाशन के एस. के. झा कहते हैं कि वह पुस्तक मेले से बहुत खुश नहीं है। वह कहते हैं कि यहां पर अनुशासन की कमी थी और प्रकाशकों को उनके प्रकाशनों के प्रस्तुतिकरण के लिए मिली सुविधाएं अपर्याप्त थीं।

उन्होंने बताया कि इस साल हुई बिक्री से मेले में दुकान लगाने के लिए प्राप्त स्थान का किराया 42,000 रुपये भी नहीं चुकाया जा सका। अंतिम तीन दिनों में किताबों की बिक्री कुछ बढ़ी है।

शैक्षिक किताबों के प्रकाशक पालग्रेव मैकमिलान के क्षेत्रीय मैनेजर सुनील शर्मा कहते हैं कि वर्ष 2008 की तुलना में इस साल अच्छा व्यवसाय नहीं हुआ है।

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