Friday March 12,2010 | Last Updated 11:52 AM .
Report a Problem
Welcome, Guest
यूजर नेम/ईमेल पासवर्ड
होम देश दुनिया राजनीति खेल अर्थ जगत मनोरंजन विकास लाइफ स्‍टाइल विज्ञान-तकनीक युवा कोना जिंदगीनामा साक्षात्‍कार विविध विचार साहित्‍य-संस्‍कृति नागरिक पत्रकारिता क्राइम
प्रथम विश्व निमोनिया दिवस पर विशेष: निमोनिया से होने वाली मौतों को घटाने के लिए प्रतिबद्धता जरूरी
Bookmark and Share



प्रकाशन तरीख : 01-Nov-2009 02:54:30 द्वारा: बॉबी रमाकांत Font Size:

नई दिल्‍ली: निमोनिया का इलाज सस्ता एवं हर जगह उपलब्ध है। निमोनिया के लिए न तो वैक्सिन शोध चाहिए, न नई दवाएं, न नई जांचें क्योंकि प्रभावकारी इलाज सस्ता है और उपलब्ध भी। इसके बावजूद निमोनिया से हर साल 20 लाख बच्चों (5 साल से कम उम्र) की मौत होती है।

"निमोनिया होने पर फेफड़ों में हवा की थैलियों में संक्रमण या बलगम भर जाता है। गम्भीर निमोनिया घातक भी हो सकती है।" यह कहना है प्रोफ़ेसर (डॉ.) रमाकान्त का, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लू.एच.ओ.) के अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार (2005) प्राप्त चिकित्सक हैं और लखनऊ के छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय में सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष हैं।

डॉ. डॉ. रमा कान्त कहते हैं, "निमोनिया के लक्षण हैं- सामान्य से अधिक तेज़ सांस या सांस लेने में परेशानी, सांस लेते या खांसते समय छाती में दर्द, खांसी के साथ पीले, हरे या जंग के रंग का बलगम, बुखार, कंपकंपी या ठंड लगना, पसीना आना, होंठ या नाखून नीले होना" आदि। 

डॉ. रमा कान्‍त कहते हैं कि निमोनिया की जांच - "स्पूटम कल्चर" - अधिकांश स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपलब्ध होती है। इसके बावजूद निमोनिया से हर 15 सेकंड में एक बच्चा मर जाता है, जो बेहद खेद की बात है।

"आख़िर निमोनिया से बच्चे क्यों मर रहे हैं?" यह सवाल जन-स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को आतंकित करता रहा है। यही वजह है कि इस वर्ष 2 नवम्बर 2009 को पहले विश्व निमोनिया दिवस मनाया जा रहा है। तपेदिक (टी.बी.) एवं अन्य फेफड़े के उन्मूलन के लिए समर्पित अंतरराष्ट्रीय संस्था (इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्टटुबेर्कुलोसिस एंड लंग डिसीस - "द यूनियन") भी निमोनिया की रोकधाम एवं उन्मूलन के लिए समर्पित है।

यूनियन के एक शोध में पाया गया कि ऐसे 68 देशों में, जहाँ निमोनिया से होने वाली मौतों की दर अधिक है, सिर्फ़ 32 प्रतिशत (निमोनिया से पीडि़त बच्चों  या जिन बच्चोंक को निमोनिया होने की आशंका होती है) बच्चों को ही उचित दवा मिल पाती है। 68 प्रतिशत बच्चे, जिनको निमोनिया होने की आशंका होती है, उपचार से वंचित रह जाते हैं। यह अत्यन्त दुःखद है क्योंकि निमोनिया का उपचार सस्ता है और स्वास्थ्य केन्द्रों में उपलब्ध भी।

यदि विश्व को 2015 तक बच्चों की मृत्यु दर 50 प्रतिशत तक कम करने का सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य (मिलिनिम डेवेलपमेंट गोल) हासिल करना है, तो निमोनिया नियंत्रण एवं उन्मूलन के लिए कार्यक्रमों को प्रभावकारी ढंग से लागू करना बहुत जरूरी है।

 

(बाबी रमाकांत, विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक द्वारा 2008 में पुरस्कृत हैं और सिटिज़न न्यूज़ सर्विस (www.citizen-news.org) के संपादक हैंईमेल: bobbyramakant@yahoo.com)

इस लेखक की दूसरी खबरें
  • टी.बी. की वजह से महिलाएं हो जाती हैं बेघर
  • प्रो. रमा कान्त को 2010 का ‘अमृतलाल नागर सम्मान ’
  • डॉ रमा कान्त सर्जन्स एसोसिएशन की उप्र इकाई अध्यक्ष बने
  • यूपी : ए.एस.आई. की 35वीं वार्षिक संगोष्ठी आज से शुरु
  • तम्बाकू उत्पादनों पर चित्रमय चेतावनियों का अनुपालन सख्ती से नहीं
  • यह कैसी आजादी है?
  • लोकसभा चुनावों में अखबारों ने तोड़ा पाठकों का भरोसा
  • वाह शाद वाह! लखनऊ के एक बेहतरीन शायर से एक मुलाक़ात
  • आतंकवाद एवं साम्प्रदायिकता की राजनीति
  • न्यायालय द्वारा मजदूरों के बेरोज़गारी भत्ते के कानूनी अधिकार पर स्थगनादेश
  • चर्चा मंच
      

    << पिछला अगला >>
    अभी तक कोई टिप्‍पणी नहीं की गई है। अगर पहले व्‍यक्ति बनना चाहते हैं तो चर्चा शुरू करें।

    अपनी टिप्‍पणी दें:
    नाम:
    ईमेल:
    आपका वेबसाइट/ब्‍लॉग:
    भाषा चुनॆ :
    आपकी टिप्‍पणी:  

    नीले बॉक्‍स में दिखाई दे रहे नंबर को यहां डालें। :  

     
    FIH Hockey World Cup 2010
    नागरिक पत्रकार लॉगिन
    यूजर नेम/ईमेल
    पासवर्ड
    नए यूजर यहां क्लिक करें ? रजिस्‍टर
    नागरिक पत्रकारिता: अन्‍य खबरें
    आज की बड़ी खबरें
    आपका मत
    क्‍या महिला आरक्षण बिल में 'आरक्षण के अंदर आरक्षण' होना चाहिए?
    हां
    नहीं
    निर्णय करने की स्थिति में नहीं हूं
    आमने-सामने   RSS 
    हास्‍य अभिनेता व कवि एहसान कुरैशी
    द्वारा: रहीम खान
    देश में जब से टेलीविजन चैनलों की भरमार हुई है, तब से पिछड़े क्षेत्रों में रहने वाले कलाकारों को भी अपनी कला का प्रदर्.... पूरा पढ़ें
    होम | देश | दुनिया | राजनीति | खेल | अर्थ जगत | मनोरंजन | विकास | लाइफ स्‍टाइल | विज्ञान-तकनीक | युवा कोना | जिंदगीनामा | साक्षात्‍कार | विविध | विचार | साहित्‍य-संस्‍कृति | नागरिक पत्रकारिता
    हमारे बारे में | संपर्क करें | फीडबैक | नियम व शर्तें | डिस्‍क्‍लेमर | FAQ | मेरी खबर पर विज्ञापन
    ट्यूटोरियल | समस्‍या बताएं? | वीडियो | फोटो | ब्‍लॉग | आरएसएस | रजिस्‍टर | पासवर्ड गुम
    Copyright www.merikhabar.com All rights reserved.