Thursday March 11,2010 | Last Updated 11:18 AM .
Report a Problem
Welcome, Guest
यूजर नेम/ईमेल पासवर्ड
होम देश दुनिया राजनीति खेल अर्थ जगत मनोरंजन विकास लाइफ स्‍टाइल विज्ञान-तकनीक युवा कोना जिंदगीनामा साक्षात्‍कार विविध विचार साहित्‍य-संस्‍कृति नागरिक पत्रकारिता क्राइम
न्यायालय द्वारा मजदूरों के बेरोज़गारी भत्ते के कानूनी अधिकार पर स्थगनादेश
Bookmark and Share

कीवर्ड
,


प्रकाशन तरीख : 02-Feb-2009 13:26:12 Font Size:

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत उत्तर प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास विभाग का सीतापुर में मजदूरों को बेरोज़गारी भत्ता देने के साहसिक एवं प्रशंसनीय निर्णय को ब्लाक विकास अधिकारी (बी.डी.) ने लाहाबाद हाई कोर्ट बेंच में अपील की।

हाई कोर्ट ने पुन: आश्वासन दिया है और ग्रामीण विकास आयुक्त के अधिकारों को संग्रक्षित किया है और आयुक्तों को निर्देश दिया है कि अपीलकर्ताओं की सुनवाई हो और सही लोगों को भुगतान किया जाए।

 

 

मजदूरों के बेरोज़गारी भत्ता पाने के संवैधानिक अधिकारों की संग्रक्षा कर के ग्रामीण विकास विभाग ने यह नि:संदेह प्रशंसनीय एवं सराहनीय कदम उठाया है क्योंकि मजदूरों को यह अधिकार राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के शेड्यूल , पारा में उल्लेखित है कि यदि एक अवधि तक मजदूर को काम दिया गया हो तो उसको बेरोजगारी भत्ता मिलना चाहिए।

यह बेरोज़गारी भत्ता प्रदेश सरकार द्वारा दिया जाएगा और कि उस धनराशि से जो केंद्रीय सरकार द्वारा मजदूरों को मजदूरी देने के लिए दी जाती है।

राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम के तहत किसी भी मजदूर को कहीं और कार्य करने से मनाही नहीं है, और यदि प्रदेश सरकार मजदूर को १०० दिन का कार्य नहीं दे पा रही है, तो यदि वोह मजदूर बेरोज़गारी भत्ता की मांग करे तो उसको बेरोज़गारी भत्ता मिलना चाहिए। जिले के स्तर पर बेरोज़गारी भत्ते के मुद्दे पर विचार करने के लिए जिस समिति का गठन हुआ था उसके अध्यक्ष एक सब-डिविज़नल मजिस्ट्रेट अधिकारी थे, एवं इस समिति में दो अन्य सरकारी अधिकारी थे और उसको संस्था के प्रतिनिधि भी जिन्होंने यह मुद्दा उठाया था। इस समिति में इस मुद्दे को उठाने वाली संस्था के लोग इसलिए थे क्योंकि राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम में लोगों द्वारा ही जनता जांच करने का प्रावधान है और इस प्रक्रिया में लोगों की भागीदारी इस अधिनियम की मूल रूप के अनुकूल है।

मैं यह बात कहना चाहूंगी कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम को फरवरी २००९ को अब साल पूरे हो जायेंगे। परन्तु उत्तर प्रदेश में इस अधिनियम/ योजना को लागु करने में अधिकाँश करवाई पिछले एक साल में ही हुई है। वर्तमान प्रशासन ने इस अधिनियम को पूरी निष्ठां के साथ लागु करने का प्रयास किया है।

इसके बावजूद भी, उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम को लागु करने में कुछ खामियां भी हैं, जैसे कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना चाहिए, जरुरतमंदों को रोजगार मिलना चाहिए और भुगतान समय पर होना चाहिए आदि।

प्रदेश सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जो हादसा हरदोई में हाल ही में हुआ है, ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ हो। हरदोई के एक गाँव में जब मजदूर अपने रोजगार पाने के अधिकार की मांग कर रहे थे, तो एक प्रभावशाली प्रधान ने, उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री की शय में, मजदूरों को बर्बरता से मारा। प्रदेश सरकार के समक्ष यह एक चुनौती है कि वोह राजनितिक दबाव से ऊपर उठ कर मजदूरों के अधिकारों की संग्रक्षा करे।

अरुंधती धुरु भूख के अधिकार केस में सुप्रीम कोर्ट कमिश्नर की सलाहाकार हैं। फोन: ९४१५० २२७७२

 

[यह लेख मौलिक रूप से अंग्रेज़ी में लिखी गया था, जिसको यहाँ क्लिक करने से पढ़ा जा सकता है। इसका हिन्दी में अनुवाद करने का प्रयास किया गया है, त्रुटियों के लिए क्षमा करें]

इस लेखक की दूसरी खबरें
  • टी.बी. की वजह से महिलाएं हो जाती हैं बेघर
  • प्रो. रमा कान्त को 2010 का ‘अमृतलाल नागर सम्मान ’
  • डॉ रमा कान्त सर्जन्स एसोसिएशन की उप्र इकाई अध्यक्ष बने
  • यूपी : ए.एस.आई. की 35वीं वार्षिक संगोष्ठी आज से शुरु
  • प्रथम विश्व निमोनिया दिवस पर विशेष: निमोनिया से होने वाली मौतों को घटाने के लिए प्रतिबद्धता जरूरी
  • तम्बाकू उत्पादनों पर चित्रमय चेतावनियों का अनुपालन सख्ती से नहीं
  • यह कैसी आजादी है?
  • लोकसभा चुनावों में अखबारों ने तोड़ा पाठकों का भरोसा
  • वाह शाद वाह! लखनऊ के एक बेहतरीन शायर से एक मुलाक़ात
  • आतंकवाद एवं साम्प्रदायिकता की राजनीति
  • चर्चा मंच
      

    << पिछला अगला >>
    अभी तक कोई टिप्‍पणी नहीं की गई है। अगर पहले व्‍यक्ति बनना चाहते हैं तो चर्चा शुरू करें।

    अपनी टिप्‍पणी दें:
    नाम:
    ईमेल:
    आपका वेबसाइट/ब्‍लॉग:
    भाषा चुनॆ :
    आपकी टिप्‍पणी:  

    नीले बॉक्‍स में दिखाई दे रहे नंबर को यहां डालें। :  

     
    FIH Hockey World Cup 2010
    नागरिक पत्रकार लॉगिन
    यूजर नेम/ईमेल
    पासवर्ड
    नए यूजर यहां क्लिक करें ? रजिस्‍टर
    विकास: अन्‍य खबरें
    आज की बड़ी खबरें
    आपका मत
    क्‍या महिला आरक्षण बिल में 'आरक्षण के अंदर आरक्षण' होना चाहिए?
    हां
    नहीं
    निर्णय करने की स्थिति में नहीं हूं
    आमने-सामने   RSS 
    हास्‍य अभिनेता व कवि एहसान कुरैशी
    द्वारा: रहीम खान
    देश में जब से टेलीविजन चैनलों की भरमार हुई है, तब से पिछड़े क्षेत्रों में रहने वाले कलाकारों को भी अपनी कला का प्रदर्.... पूरा पढ़ें
    होम | देश | दुनिया | राजनीति | खेल | अर्थ जगत | मनोरंजन | विकास | लाइफ स्‍टाइल | विज्ञान-तकनीक | युवा कोना | जिंदगीनामा | साक्षात्‍कार | विविध | विचार | साहित्‍य-संस्‍कृति | नागरिक पत्रकारिता
    हमारे बारे में | संपर्क करें | फीडबैक | नियम व शर्तें | डिस्‍क्‍लेमर | FAQ | मेरी खबर पर विज्ञापन
    ट्यूटोरियल | समस्‍या बताएं? | वीडियो | फोटो | ब्‍लॉग | आरएसएस | रजिस्‍टर | पासवर्ड गुम
    Copyright www.merikhabar.com All rights reserved.