तम्बाकू के उपयोग पर नियंत्रण के लिए विश्वव्यापी समझौता (FCTC, Framework Convention on Tobacco Control) होगा। इसके तहत तम्बाकू के अवैध व्यापार पर प्रोटोकॉल तैयार हो रहा है, जिस पर पिछले हफ्ते विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूटीओ) द्वारा जिनेवा में विचार-विमर्श किया गया।
कई देशों ने इस बात पर रख्ती बरती कि तम्बाकू कंपनियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए और यदि वे तम्बाकू का अवैध व्यापार करती पकड़ी जाएं या तस्करों के साथ उनकी मिलीभगत पकड़ में आए तो उन पर सख्त करवाई हो। तम्बाकू उद्योग पर आर्थिक हर्जाना लागू हो, और सरकार के साथ उद्योग के गठबंधन पर भी रोक लगाई जाए। परन्तु जापान सरकार ने इस पर एतराज जताया। जापान सरकार जापानी तम्बाकू कंपनी की सबसे बड़ी भागीदार है। इसलिए अपने तम्बाकू व्यापार को अधिक महत्व देते हुए और जन-स्वास्थ्य और जन-हित को तिलांजलि देते हुए जापान सरकार ने पूरी कोशिश की की ये प्रोटोकॉल कमजोर बने और तम्बाकू कंपनियों के हित सुरक्षित रहें।
जापान सरकार को इसीलिए Network for Accountability of Tobacco Transnationals (NATT) द्वारा मार्लबोरो अवार्ड दिया गया। जापान सरकार का कहना था कि तम्बाकू का अवैध व्यापार राष्ट्रीय स्तर पर रोका जा सकता है और विश्वव्यापी प्रोटोकॉल की आवश्यकता नहीं है क्योंकि विश्व-स्तर पर पहले से ही व्यापार समझौते हैं।
“अन्तर-राष्ट्रीय तम्बाकू ट्रीटी को लागू करने में तम्बाकू उद्योग का हस्तक्षेप एक बड़ी चुनौती प्रस्तुत करता है” कहना है कथ्य मुल्वेय का जो कार्पोरेट अच्कोउन्ताबिलिटी इंटरनेशनल या उद्योगों को जिम्मेदार ठहराने के लिए अन्तर-राष्ट्रीय संगठन से जुड़ी हुई हैं।
“जापान टोबेको कंपनी जिसकी सबसे बड़ी भागीदार है जापान सरकार, उसके बनाए हुए तम्बाकू उत्पादन अफ्रीका के मार्केट में अवैध रूप से बिकते है” कहना है अकिंबोदे ओलुवाफेमी का जो नाइजीरिया में सामाजिक कार्यकर्ता हैं।




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