जयपुर: जयपुर के सीतापुर औद्योगिक क्षेत्र में ज्वालामुखी बने आयल डिपो में आग का तांडव तीसरे दिन शनिवार को भी जारी है। भले ही आग की लपटें पहले से कुछ कम हुई हैं, लेकिन जानकारों के मुताबिक टैंकरों में अभी बीस फीसदी ईधन बचा हुआ है। इसलिए आग पर काबू पाने में एक-दो दिन और लग सकते हैं। इस बीच बचाव दल को तीन और शव मिले हैं। जिसमें दो शव आईओसी के इंजीनियर के थे। प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूरे क्षेत्र का दौरा कर हालात का जायजा लिया।
पचास घंटे की मशक्कत के बावजूद आयल डिपो में लगी आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। इससे प्रशासनिक, इंडियन आयल कारपोरेशन (आईओसी) और सेना के अधिकारियों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। टैंकों से निकल रही धुएं की लपटों को दस-दस किमी दूर तक से देखा जा सकता है। शनिवार को आग की लपटें पहले के मुकाबले कुछ कम हुईं तो विशेषज्ञ डिपो के निकट पहुंचे। इस दौरान उन्हें तीन शव नजर आए। इसमें दो आईओसी के इंजीनियर के शव हैं। गृह सचिव प्रदीप सेन और जिला कलेक्टर कुलदीप रांका ने अब तक आठ लोगों के मरने की और सौ लोगों के घायल होने की पुष्टि की है। घायलों में 15 की हालत गंभीर बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक मरने वालों की संख्या 15 और घायलों की संख्या करीब दो सौ है।
डिपो से दस से पंद्रह किमी दूर तक के दस हजार परिवारों को अन्य सुरक्षित स्थानों पर भेज गया है। दो दिन से ये परिवार सरकार की ओर से बनाए गए आश्रय स्थलों एवं अपने परिजनों के यहां ठहरे हुए हैं।
मथुरा और दिल्ली से आए विशेषज्ञ के साथ-साथ सेना के जवान, पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी आसपास जमे हुए हैं। जो आग की लपटें कम होते ही बचाव कार्य शुरू करने की तैयारी में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के कारण तीन टैंक गल रहे हैं। अगर इनका गलना जारी रहता है तो टैंकों से पेट्रोल, डीजल का रिसाव हो सकता है। इससे आग एक बार फिर भड़क सकती है। इसलिए सेना के जवान टैंको से कुछ दूरी पर मिट्ी के गड्ढे खोद रहे हैं। जिससे रिसने वाला ईधंन इनमें चला जा।
-एक हजार करोड़ रुपए हुए स्वाह
अब तक की पड़ताल में जो बात सामने आई है उसमें करीब एक हजार करोड़ रुपए के नुकसान की जानकारी सामने आई है। इसमें आयल का नुकसान पांच सौ करोड़ का और इतना ही सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित इकाइयों एवं शिक्षण संस्थानों को आर्थिक नुकसान हुआ है। आग से 50 औद्योगिक इकाइयां और नौ कालेज तबाह हो गए हैं। इससे दस हजार लोगों के बेरोजगार होने की आशंका है। अधिकारियों का कहना है कि इनमें से अधिकांश इकाइयों के चालू होने में छह माह से एक साल तक का समय लग सकता है।
-दस करोड़ लीटर तेल धुएं में उड़ा
डिपो में लगी आग से दस करोड़ लीटर तेल जल गया। इस तेल से एक लाख छोटे चौपहिया वाहन एक साल तक चलाए जा सकते थे। पेट्रोलियम कंपनियों के अधिकारियों के मुताबिक जयपुर में रोजाना दो लाख लीटर पेट्रोल और दस लाख लीटर डीजल खर्च होता है। इस हिसाब से छह महीने का पेट्रोल और एक माह का डीजल आग में खत्म हो गया।



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