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किसी क्षेत्र में तो हम सर्वश्रेष्ठ बनें: नारायणमूर्ति
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Posted On: 09-Nov-2009 12:54:12 PM By: नेहा शर्मा Font Size: Increase Font Size Decrease Font Size
किसी क्षेत्र में तो हम सर्वश्रेष्ठ बनें: नारायणमूर्ति

नई दिल्ली : भले ही देश में वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का तीसरा सबसे बड़ा समूह हो औरर अंतरिक्ष में देश ने लंबी छलांग लगाई हो लेकिन, आज भी कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जिसमें कहा जा सके कि हम दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है। इंफोसिस के चैयरमैन एनआर नारायणमूर्ति ने अपनी किताब ‘बेहतर भारत बेहतर दुनिया’ में लिखा है, 'हमारे वैज्ञानिक और इंजीनियरों ने चांद पर अंतरिक्ष यान भेजा। उपग्रह के जरिए हमने देश के हर गांव में टेलीविजन की पहुंच बनाई और असम और केरल तक के सुदूर गांव दिल्ली से बस एक फोन की दूरी पर है।'

उन्होंने आगे लिखा है, 'हमारे यहां विश्वस्तरीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा समूह है। खाद्यान्न उत्पादन के साथ ही बांध राकेट और उपग्रह बनाने में भी हम आत्मनिर्भर हो गए हैं। मगर कोई भी एक ऐसा क्षेत्र नहीं है जिसमें हम आत्म विश्वास के साथ कह सकें कि हम दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हैं।' नारायणमूर्ति ने ‘भारत की तस्वीर बदल देने वाले आठ दृष्टिकोण’ वाले अध्याय में हरित क्रांति, श्वेत क्रांति, 1991 के आर्थिक सुधार, दूरसंचार क्रांति, अंतरिक्ष तकनीक, परमाणु ऊर्जा, साफ्टवेयर क्रांति और स्वतंत्र व निडर मीडिया का जिक्र करते हुए कहा है कि वह ऐसा भारत चाहते हैं जिसे दुनिया में विज्ञान सहित हर मंच पर सम्मान हासिल हो।

नारायणमूर्ति ने लिखा है, 'भारत के इतिहास में पहली दफा साफ्टवेयर निर्यात के क्षेत्र में हमें दुनिया की तारीफ मिली। हमारी उपलब्धियां प्रशंसनीय हैं लेकिन हम अपनी मैराथन की शुरुआती अवस्था में हैं। मैंकिसी के अध्ययन के मुताबिक 1998 में दुनिया के बाजार में साफ्टवेयर बाजार का कुल योगदान 270 अरब डॉलर का था, जिसमें भारत से आउटसोर्स किया गया, हिस्सा 4 अरब डॉलर का था।'

उन्होंने लिखा है कि पहली सहस्त्राब्दी में देश ने गणित, खगोल, शल्य चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में ऊंचाइयों को छुआ जिसमें आर्यभट्ट, वराहमिहिर, ब्रह्मपुत्र और सुश्रुत जैसे लोगों का अहम योगदान था। दूसरी सहस्राब्दी देश के लिए भयंकर रही, क्योंकि इस दौरान देश विदेशी शासकों के चंगुल में रहा और इन विजेताओं ने कला और आनंद पर ध्यान दिया और देश में विज्ञान और तकनीक की तरक्की को प्रोत्साहन नहीं दिया। सौभाग्य से पिछले बीस सालों में साफ्टवेयर के विकास में जबरदस्त तरक्की हुई है और भारत के पास तमाम बाधाओं के बावजूद आगे बढ़ने की क्षमता है।

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