नई दिल्ली: माउस की एक क्लिक से दुनिया भर की जानकारी पेश कर देने वाले कंप्यूटर ने आज कई कामों को आसान बना दिया है और मानव श्रम को सीमित कर दिया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह जादुई मशीन अपने अंदर भरते जा रहे ‘‘कबाड़’’ को लेकर बिसूरती भी है।
सॉफ्टवेअर इंजीनियर राजीव दास कहते हैं ‘‘कंप्यूटर में उन्हीं फाइलों को सेव करना चाहिए जिनकी जरूरत है। कई बार लालच में अंधाधुंध फाइलें सेव कर दी जाती हैं। जिन फाइलों का काम हो जाता है, उन्हें डिलीट नहीं किया जाता। नतीजा यह होता है कि बेवजह बाइट्स कम होती जाती हैं। कैपेसिटी कम होने से समस्या हो जाती है।’’
दास कहते हैं ‘‘इससे पहले कि आपके कंप्यूटर में कोई खराबी आए, कोई विशेषज्ञ उसे सुधारने के लिए आए, आपकी फाइलें डिलीट करे, आप खुद ही उन फाइलों को कंप्यूटर से हटा दें जिनकी आपको जरूरत नहीं है। फाइल सेव करते समय भी देख लेना चाहिए कि उपयोगी हिस्सा ही रखा जाए। अधिक फाइलें, कम बाइट्स के कारण कंप्यूटर के काम करने की गति भी धीमी हो जाती है।’’
हार्डवेअर विशेषज्ञ प्रमिला मीरचंदानी कहती हैं ‘‘कंप्यूटर कंप्यूटर होता है, फाइलें रखने वाला कैबिनेट नहीं। हार्डड्राइव तब ही अच्छी तरह काम कर पाएगा जब कंप्यूटर की विभिन्न ड्राइव की मेमोरी अधिक होगी। बेवजह बाइट्स भरने से कभी भी फाइलों के उड़ जाने का खतरा होता है।’’



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