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वैश्वीकरण की देन है उपभोक्तावाद, जिसका सीधा असर पड़ा है हमारे दर्शकों और विज्ञापन जगत पर। एक आम धारणा बन गयी है कि जो भी बिकता है, बेचो। इसी धारणा के चलते विज्ञापन कम्पनियां सब कुछ बेचने को तैयार हैं, चाहे वह नारी देह हो या हमारी भावनाएं।भारतीय समाज में लज्जा को न....
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भारत अनेकता में एकता का देश है। यह तथ्य पूरा विश्व जानता है, लेकिन यह बात मुझे और बेहतर ढ़ंग से तब समझ में आई, जब हमने संसद में अलग-अलग स्वर में अलाप करने वाले सांसदों को एक स्वर में एक ही मसले पर एक साथ चिल्लाते देखा। वह मसला था, स्वयं के वेतन-भत्तों की बढ़ोत्तरी का....
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‘फूलों से मिटा हूं न बुझाने से बुझा हूं।मैं वक्त हूं तारीख के माथे पे लिखा हूं।।’इस कायनात का बहुमूल्य खजाना है वक्त... जिसे न खरीदा जा सकता है, न बेचा जा सकता है, ना ही भविष्य के लिये सुरक्षित रखा जा सकता है। यह एक ऐसा अनमोल मोती है, जिसे लाख चाहने के बावजूद खोकर ....
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ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ने वाला सलीम दसवीं कक्षा की छात्रा शबनम की सरेआम सड़क पर चाकू घोंपकर इसलिए हत्या कर देता है क्योंकि वह उससे बहुत प्रेम करता था, लेकिन शबनम उसमें रूचि न लेकर, एक अन्य साथी सिराज के प्रति ज्यादा लगाव रखती थी। बारहवीं कक्षा में साथ-साथ पढ़ने....
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स्वामी विवेकानंद का कथन है- ‘जिस मनुष्य में आत्मविश्वास नहीं है, वह बलवान होकर भी डरपोक है और विद्वान होकर भी मूर्ख है।’ अर्थात् वह व्यक्ति, जो सर्वगुण सम्पन्न और योग्य होता है, किन्तु अगर उसमें आत्मविश्वास न हो, तो सफलता उससे हमेशा दूर ही रहती है। इसी आत्मवि....
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कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के बाद अब राज्य को ‘मुस्लिम सूबा’ बनाए जाने की साजिश रची जा रही है। इसके लिए आतंकी संगठन अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए कश्मीर को ‘मुस्लिम सूबा’ बनाने की कोशिशों में जुट गए हैं। अपने मकसद में कामयाब होने के लिए आतंकी संग....
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